धनबाद की राशिदा नाज़ ने बिना ट्यूशन 97.8% अंक लाकर झारखंड साइंस टॉप किया। आर्थिक तंगी के बावजूद ऑनलाइन पढ़ाई कर उन्होंने कई सामाजिक धारणाओं को चुनौती दी
झारखंड के 48 शहरी निकाय चुनाव परिणामों में भाजपा को सीमित सफलता मिली। रांची, गिरिडीह और देवघर समेत कई शहरों में झामुमो और निर्दलीय उम्मीदवारों ने मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया।
झारखंड म्युनिसिपल चुनाव 2026 में शहरों से झामुमो की बढ़त के संकेत मिल रहे हैं। कई सीटों पर भाजपा को कड़ी चुनौती है, जबकि रांची और धनबाद में मुकाबला अभी भी बेहद रोमांचक बना हुआ है
2026 के म्युनिसिपल चुनाव में गिरिडीह शहर गोलीबारी से दहल गया। वार्ड 18 की घटना के बाद शिवम आजाद चर्चा में हैं, जबकि प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
दो बार जिला परिषद सदस्य रह चुकी प्रमिला मेहरा गिरिडीह मेयर चुनाव में मैदान में हैं। उन्होंने पानी, ट्रैफिक और सफाई को प्राथमिकता बताते हुए सबको साथ लेकर चलने का भरोसा दिया।
झारखंड सरकार पर्यटन को नया आयाम देने के लिए बड़े बदलाव कर रही है, जिसमें इको-टूरिज्म, होमस्टे और होटल इंडस्ट्री में सुधार शामिल है। पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का कहना है कि धार्मिक पर्यटन पर खर्च होने वाले बजट को संतुलित कर राज्य की सांस्कृतिक, प्राकृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। जेईटीए को पुनर्जीवित कर विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, जेएफ़एमसी में महिलाओं की भागीदारी 50% तक बढ़ाई जा रही है, और स्काईडाइविंग से लेकर जंगल सफारी तक नए पर्यटन अनुभवों पर काम हो रहा है।
झारखंड में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के भुगतान में देरी से लाखों लोग प्रभावित हो रहे हैं। झारखंड जनाधिकार महासभा ने वित्त मंत्री से इसे ₹1000 से बढ़ाकर ₹2500 करने का सुझाव दिया। साथ ही, शिक्षकों की कमी और बेहतर वेतन के लिए भी सरकार से शीघ्र कदम उठाने की मांग की गई
आज 70 घंटे काम करने की बहस जोरों पर है, गिरिडीह के मजदूर अपनी 12 घंटे की शिफ्टों में लंबे समय से काम करने पर मजबूर हैं। स्पंज आयरन फैक्ट्रियों से होने वाला प्रदूषण एक समानांतर संकट बन चुका है, जिससे विरोध और न्याय की मांगें उठ रही हैं। राजनीतिक महत्व के बावजूद, यह ज़िला श्रमिक कानूनों और पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी का एक बड़ा उदाहरण बना हुआ है
फिनलैंड के शिक्षा मॉडल और स्वीडन की स्वास्थ्य प्रणाली से प्रेरित झारखंड, रोजगार और महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता देकर अपने भविष्य की नींव रख सकता है। प्राकृतिक सौंदर्य, पर्यटन, और खेल में सुधार राज्य को देश और विदेश में नई पहचान दिला सकते हैं। आदिवासी अधिकारों और ग्रामीण पलायन रोकने के उपाय झारखंड को विकसित राज्य की श्रेणी में खड़ा कर सकते हैं