यूट्यूब से पढ़ाई, कलाम से प्रेरणा: स्टेट टॉपर राशिदा नाज़ की कामयाबी की कहानी

झारखंड की राशिदा नाज़ ने बिना किसी प्राइवेट ट्यूशन के 97.8 प्रतिशत अंक लाकर साइंस स्ट्रीम में राज्य टॉप किया। धनबाद के साधारण परिवार से आने वाली राशिदा ने यूट्यूब और ऑनलाइन क्लासेज के सहारे अपनी पढ़ाई पूरी की। APJ Abdul Kalam से प्रेरित राशिदा अब BTech कर अपने सपनों को आगे बढ़ाना चाहती हैं

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कोलकाता/रांची: ऐसे दौर में जब रिपोर्टें लगातार यह बता रही हैं कि साइंस की पढ़ाई में लड़कियों और मुसलमानों की भागीदारी कम होती जा रही है, झारखंड एकेडमिक काउंसिल के ताज़ा नतीजों ने एक मजबूत और उम्मीद भरी तस्वीर पेश की है।

साइंस स्ट्रीम में टॉप तीन रैंक हासिल करने वाले छात्रों ने न सिर्फ पढ़ाई में कमाल किया, बल्कि समाज में बने कई स्टीरियोटाइप्स को भी तोड़ा। इनमें सबसे बड़ा नाम है धनबाद की 17 साल की मुस्लिम छात्रा राशिदा नाज़ का, जिसने 97.8 प्रतिशत अंक लाकर पूरे राज्य में टॉप किया।

राशिदा को मैथ्स में 98, केमिस्ट्री में 99 और फिजिक्स में 98 नंबर मिले। ये नंबर सिर्फ उसकी मेहनत और काबिलियत नहीं, बल्कि आर्थिक मुश्किलों के बीच उसके हौसले की भी कहानी कहते हैं। खास बात यह है कि उसने प्लस टू की पढ़ाई के दौरान कोई प्राइवेट ट्यूशन नहीं लिया।

DAV +2 हाई स्कूल, पाथरडीह की छात्रा राशिदा ने इससे पहले USS बरारी कोलियरी, झरिया से मैट्रिक की परीक्षा में 94 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। यानी स्टेट टॉपर बनने से पहले ही उसने अपनी प्रतिभा का परिचय दे दिया था।

“मैं ट्यूशन अफोर्ड नहीं कर सकती थी, इसलिए ऑनलाइन पढ़ाई की। यूट्यूब पर साइंस की क्लासेज देखती थी और खुद तैयारी करती थी,” राशिदा ने eNewsroom से फोन पर बात करते हुए कहा।

राशिदा अपने परिवार के साथ धनबाद में कोलियरी जमीन पर बने एक छोटे से सीमेंट-शीट वाले घर में रहती है। वह मोहम्मद रुस्तम अंसारी और गुलअफ़्शा परवीन की सबसे छोटी बेटी है। उनके पिता एक प्राइवेट कंपनी में स्टोरकीपर हैं और परिवार की पढ़ाई-लिखाई का खर्च बड़ी मुश्किल से उठाते हैं। लेकिन तालीम इस परिवार की सबसे बड़ी ताकत बन गई।

राशिदा की बड़ी बहन कनिज फातिमा ने इंग्लिश में मास्टर्स किया है, जबकि भाई जुनैद अंसारी बीसीए की पढ़ाई कर रहे हैं।

टिन की छत वाले घर से स्टेट टॉपर बनने तक का सफर

स्टेट टॉपर बनने के बाद भी राशिदा के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब आगे की पढ़ाई है।

“मैं बीटेक करना चाहती हूं। लेकिन मैं IIT-JEE की परीक्षा नहीं दे पाई क्योंकि मेरे परिवार के पास इतना खर्च उठाने की क्षमता नहीं थी। अगर इंडियन स्कूल ऑफ माइंस या BIT सिंदरी में एडमिशन मिल जाए, तो मैं वहीं पढ़ाई जारी रखना चाहूंगी,” उसने कहा।

राशिदा के आदर्श पूर्व राष्ट्रपति APJ Abdul Kalam हैं, जिनकी बातें उसे हमेशा प्रेरित करती हैं।

“मुझे कलाम सर का यह कोट बहुत पसंद है — ‘सपना वो नहीं जो आप सोते वक्त देखते हैं, सपना वो है जो आपको सोने न दे।’”

लेकिन रिजल्ट आने के दो दिन बाद तक भी झारखंड सरकार की तरफ से राशिदा को किसी तरह की आर्थिक मदद या सरकारी सहायता मिलने की खबर नहीं है।

उसके भाई जुनैद ने कहा, “हम चाहते हैं कि वह अपनी पसंद का सब्जेक्ट पढ़े। अगर सरकार मदद करे तो उसका सपना पूरा हो सकता है।”

सामाजिक बंदिशों को तोड़ती झारखंड की बेटियां

झारखंड साइंस टॉपर्स की सूची खुद एक बड़ी सामाजिक कहानी बयान करती है। राशिदा के साथ आकांक्षा कुमारी और सना अफरीन ने संयुक्त रूप से 481 अंकों के साथ तीसरा स्थान हासिल किया।

वहीं फैज़ान आलम ने 483 अंकों के साथ राज्य में दूसरा स्थान प्राप्त किया।

ऐसे माहौल में जहां अक्सर लड़कियों और अल्पसंख्यकों को साइंस शिक्षा में पीछे बताया जाता है, झारखंड के ये नतीजे एक मजबूत संदेश देते हैं — प्रतिभा हर जगह मौजूद है, लेकिन मौके हर किसी को बराबर नहीं मिलते।

और शायद यही बात राशिदा नाज़ की कहानी को सिर्फ एक बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट से कहीं बड़ा बना देती है। धनबाद के एक छोटे से टिन की छत वाले घर से निकली एक लड़की ने आर्थिक तंगी के बीच मुफ्त ऑनलाइन पढ़ाई के सहारे पूरे राज्य में साइंस की सबसे होनहार छात्रा बनने का मुकाम हासिल किया।

अब उसे सिर्फ एक मौके की जरूरत है, ताकि वह अपने सपनों को आगे बढ़ा सके।

Shahnawaz Akhtar
Shahnawaz Akhtarhttp://shahnawazakhtar.com
Shahnawaz Akhtar is a senior journalist with over two decades of reporting experience across four Indian states and China. He is the Managing Editor and founder of eNewsroom India, an independent, Kolkata-based digital media platform. His work focuses on human-interest reporting, capturing lived realities, resilience, and voices often ignored by mainstream media

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