8,272 वोट से शुरू हुई सुदिव्या कुमार सोनू की चुनावी कहानी 94,042 वोट तक पहुंची। लेकिन उनकी असली राजनीतिक ताकत चुनावी जीत से कहीं आगे थी—शिबू सोरेन का भरोसा, हेमंत सोरेन का साथ और JMM की रणनीति में उनकी अहम भूमिका
धनबाद की राशिदा नाज़ ने बिना ट्यूशन 97.8% अंक लाकर झारखंड साइंस टॉप किया। आर्थिक तंगी के बावजूद ऑनलाइन पढ़ाई कर उन्होंने कई सामाजिक धारणाओं को चुनौती दी
झारखंड के 48 शहरी निकाय चुनाव परिणामों में भाजपा को सीमित सफलता मिली। रांची, गिरिडीह और देवघर समेत कई शहरों में झामुमो और निर्दलीय उम्मीदवारों ने मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया।
झारखंड म्युनिसिपल चुनाव 2026 में शहरों से झामुमो की बढ़त के संकेत मिल रहे हैं। कई सीटों पर भाजपा को कड़ी चुनौती है, जबकि रांची और धनबाद में मुकाबला अभी भी बेहद रोमांचक बना हुआ है
दो बार जिला परिषद सदस्य रह चुकी प्रमिला मेहरा गिरिडीह मेयर चुनाव में मैदान में हैं। उन्होंने पानी, ट्रैफिक और सफाई को प्राथमिकता बताते हुए सबको साथ लेकर चलने का भरोसा दिया।
महेंद्र सिंह, तीन बार विधायक और जनसंघर्षों के नेता, जिन्होंने ‘मैं हूँ महेंद्र सिंह’ कहकर गोलियों का सामना किया और झारखंड की राजनीति में अमिट विरासत छोड़ी।
शिबू सोरेन ने न सिर्फ वंशवाद के आरोपों का जवाब अपने कार्यों से दिया, बल्कि ज़मीनी कार्यकर्ताओं और विरोधी वर्गों के लोगों को भी आगे बढ़ाया। उन्होंने संघर्ष, समावेश और नेतृत्व की मिसाल कायम की। गुरुजी की छाया में संजीव कुमार राज्यसभा पहुंचे और सुदिव्य मंत्री बने।