न कोई राजनीतिक विरासत, न आसान जीत: ऐसे JMM के ‘चाणक्य’ बने सुदिव्य सोनू

राजनीतिक विरासत के बिना शुरू हुआ सफर JMM में तीन दशक की निष्ठा, चुनावी संघर्ष और रणनीतिक भूमिका के जरिए सत्ता के केंद्र तक पहुंचा

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गिरिडीह: सुदिव्य कुमार सोनू का रविवार तड़के 56 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। CCL में ठेकेदारी से शुरुआत करने वाले सोनू आगे चलकर झारखंड के पर्यटन, नगर विकास और उच्च शिक्षा मंत्री बने।

PHED इंजीनियर शंभूनाथ के सबसे छोटे बेटे सोनू ने गिरिडीह में सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) में ठेकेदारी से अपना सफर शुरू किया। बाद में उन्होंने दामोदर घाटी निगम (DVC) और कुछ अन्य संस्थानों में भी काम किया।

1989 में उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) का दामन थामा। उस दौर में जब कई नेता बार-बार पार्टियां बदलते थे, सोनू जीवन के आखिरी दिन तक JMM के साथ बने रहे।

2009 के विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के कुछ ही समय बाद उन्हें जेल भी जाना पड़ा। अपने पहले विधानसभा चुनाव में सोनू को सिर्फ 8,272 वोट मिले। पांच साल बाद उनके वोट बढ़कर 47,517 हो गए, लेकिन दोनों ही चुनावों में वह जीत हासिल नहीं कर सके।

CCL की ठेकेदारी से JMM के ‘चाणक्य’ तक

2019 में उन्हें पहली बार जीत मिली। उन्हें 80,871 वोट मिले। पिछली विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपनी जीत दोहराई और 94,042 वोट हासिल किए।

लेकिन सोनू की राजनीतिक यात्रा को सिर्फ उनके चुनावी प्रदर्शन के आंकड़ों से नहीं समझा जा सकता। उन्हें JMM के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन, जिन्हें लोग प्यार से गुरुजी कहते हैं, का दत्तक पुत्र माना जाता था। वहीं, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन उन्हें “सोनू भैया” कहकर बुलाते थे।

जिस व्यक्ति का कोई राजनीतिक परिवार या मजबूत राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं थी, वह गुरुजी के बेटे जैसा और हेमंत सोरेन के भाई जैसा भरोसेमंद व्यक्ति रातोंरात नहीं बना। उन्होंने लंबे समय तक JMM के संस्थापक शिबू सोरेन के साथ काम किया और बाद में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लिए भी एक मजबूत ढाल बनकर खड़े रहे।

2004 में जब शिबू सोरेन के खिलाफ पिरटांड़ दोहरे हत्याकांड का मामला दोबारा खोला गया, उस समय सोनू JMM के जिला अध्यक्ष थे। उस समय शिबू सोरेन केंद्रीय मंत्री थे और मामले के कारण उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। सोनू ने यह सुनिश्चित करने के लिए काम किया कि गुरुजी को सम्मानजनक तरीके से इस मामले से बरी कराया जा सके।

तब तक सोनू विधायक नहीं बने थे, लेकिन वह शिबू सोरेन के बेहद करीबी और भरोसेमंद सहयोगी बन चुके थे।

विधायक बनने के बाद भी वह हेमंत सोरेन के साथ मजबूती से खड़े रहे। हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के दौरान सोनू ने पार्टी को गांडेय की सुरक्षित सीट से कल्पना सोरेन को चुनाव लड़ाने का सुझाव दिया।

जब सोनू बने हेमंत की सबसे मजबूत ढाल

2024 के विधानसभा चुनाव में चुनावी रणनीतिकार के रूप में सोनू की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। उन्हें JMM का ‘चाणक्य’ भी कहा गया। उनकी रणनीति ने INDIA गठबंधन को ऐतिहासिक रूप से लगातार दूसरी बार सत्ता में लौटने में मदद की।

हेमंत सोरेन का सोनू पर कितना भरोसा था, इसका अंदाजा 2024 में उन्हें दिए गए चार महत्वपूर्ण विभागों से लगाया जा सकता है। हाल ही में JPSC और CGL परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर हुए आंदोलन के दौरान सोनू गठबंधन सरकार का प्रमुख चेहरा बने और उन्होंने आंदोलन के बीच सरकार का पक्ष मजबूती से रखा।

गिरिडीह के विधायक के रूप में अपने सात साल के कार्यकाल के दौरान उन्होंने इस पिछड़े जिले में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं लाने में भूमिका निभाई। इनमें एक विश्वविद्यालय, इंजीनियरिंग कॉलेज, चिड़ियाघर और जैव विविधता पार्क तथा पेयजल आपूर्ति परियोजना शामिल हैं।

गिरिडीह के विधायक सोनू अपने पीछे पत्नी, दो बेटियां और एक बेटे को छोड़ गए हैं।

उनके निधन की खबर सामने आते ही झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, उनकी पत्नी और गांडेय की विधायक कल्पना सोरेन तथा झारखंड कैबिनेट के कई मंत्री उनके अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि देने पहुंचे। इनमें इरफान अंसारी, हफीजुल हसन और दीपिका पांडेय भी शामिल थे।

विधायक अरूप चटर्जी और चंद्रदेव महतो, पूर्व विधायक विनोद सिंह, केंद्रीय मंत्री और कोडरमा की सांसद अन्नपूर्णा देवी, गिरिडीह की मेयर प्रमिला मेहरा समेत अलग-अलग राजनीतिक दलों के कई नेताओं, राज्य के आला अधिकारियों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी।

सुदिव्य कुमार सोनू की कहानी सिर्फ एक चुनाव जीतने वाले नेता की कहानी नहीं थी। यह एक ऐसे राजनीतिक कार्यकर्ता की कहानी थी, जिसने वर्षों की निष्ठा, संगठन में अपनी पकड़ और राजनीतिक रणनीति के दम पर JMM में अपनी अलग जगह बनाई। 8,272 वोट से शुरू हुई उनकी चुनावी यात्रा 94,042 वोट तक पहुंची और इसी सफर में वह गिरिडीह के विधायक से झारखंड सरकार के मंत्री और JMM के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकारों में शामिल हो गए।

Shahnawaz Akhtar
Shahnawaz Akhtarhttp://shahnawazakhtar.com
Shahnawaz Akhtar is a senior journalist with over two decades of reporting experience across four Indian states and China. He is the Managing Editor and founder of eNewsroom India, an independent, Kolkata-based digital media platform. His work focuses on human-interest reporting, capturing lived realities, resilience, and voices often ignored by mainstream media

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