राय

वक्त बदला, शहर बदले, रिश्ता नहीं

सुदिव्य सोनू के साथ मेरा रिश्ता सिर्फ एक नेता और पत्रकार का नहीं था। मैं उनका वोटर था, पत्रकार था और दोस्त भी। गिरिडीह से चीन तक, चुनावी राजनीति से निजी बातचीत तक, वक्त और शहर बदलते रहे, लेकिन हमारे बीच का भरोसा बना रहा।

Dear Gen Z: बेहतर भारत की राह नफ़रत के ख़िलाफ़ आंदोलन से होकर गुज़रेगी

36 दिनों में सफल हुए Gen Z आंदोलन की सबसे बड़ी जीत सिर्फ़ सरकार को झुकाना नहीं थी, बल्कि अपने मुद्दे को हिंदू-मुस्लिम बहस बनने से बचाना भी था। अब उसके सामने अगली चुनौती नफ़रत की राजनीति और बराबरी की नागरिकता का सवाल है

राशन पर ओटीपी की मुहर: झारखंड की हाशिए की आबादी भूख और अपमान के बीच फंसी

झारखंड में राशन कार्ड अपडेट के लिए अब आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर OTP जरूरी हो गया है। इससे ग्रामीण महिलाओं और गरीब परिवारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सीमित डिजिटल साक्षरता, मोबाइल की कमी और बढ़ते खर्च ने सरकारी योजनाओं की पहुंच को और सीमित कर दिया है।

इतिहास की अदालत में औरंगजेब: न्याय, मिथक और राजनीति

क्या इतिहास सत्ता की चकाचौंध में धुंधला हो सकता है? मुगल शासक औरंगजेब की विरासत, जो सात समंदर पार प्रसिद्ध थी, आज एकतरफा नैरेटिव के घेरे में है। उसकी उपलब्धियों और गलतियों का सम्यक मूल्यांकन करने के बजाय, अतीत को विकृत कर वर्तमान की राजनीति साधने का प्रयास हो रहा है।

गणतंत्र दिवस: संविधान और आज की हकीकत

76वें गणतंत्र दिवस पर संविधान के वादे पर सवाल उठते हैं। भेदभाव, धार्मिक ध्रुवीकरण और अल्पसंख्यकों, ख़ास कर मुसलमानों और ईसाइयों पर बढ़ते हमले गणतंत्र की भावना को कमजोर कर रहे हैं। समानता और न्याय के संवैधानिक मूल्यों को बचाने की जरूरत पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। क्या भारत वाकई सबके लिए समान है?
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क्या यह सही नहीं है कि भयंकर बेरोज़गारी के बाद भी युवाओं ने हमेशा बीजेपी को मौक़ा दिया? रविश का युवाओं को खुला ख़त

मेरे प्यारे आक्रोशित युवाओं, मीडिया तो अभी से आपको अग्निवीर कहने लगा। जिस नीति के विरोध में आप सड़कों पर उतरे हैं, उसी नीति के...

अब कोई दूसरा कमाल ख़ान नहीं होगा

उन्होंने केवल पत्रकारिता की नुमाइंदगी नहीं की, पत्रकारिता के भीतर संवेदना और भाषा की नुमाइंदगी नहीं की, बल्कि अपनी रिपोर्ट के ज़रिए अपने शहर...

पेसा कानून: 25वीं वर्षगांठ पर प्रभावी क्रियान्वयन का प्रश्न

भारत के संबंधित राज्यों के राज्यपालों को पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों पर वनवासी संरक्षण के अनुकूल शासन करने के लिए विशेष...

घटते भारत के खेत के आकार और बढ़ती भूख

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के निर्णय को अभी ज्यादा वक्त नहीं गुजारा है. इस बीच प्रधानमंत्री के निर्णय...

पेंशन सहित सामाजिक सुरक्षा की सभी नीतियों पर बहस हो और अध्ययन हो

पुरानी पेंशन व्यवस्था ख़त्म की जा चुकी है। बैंकों में बचत दर अब न्यूनतम स्तर पर है। नई पेंशन स्कीम है। इसका क्या रिकार्ड...

छोटे बनाम बड़े किसान क्यों कर रही थी सरकार?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछली 10 फरवरी को लोकसभा में कृषि कानूनों पर एक लंबा भाषण दिया था। इस दौरान उन्होंने छोटे किसान के...
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