झारखंड के इस विधायक ने विधानसभा में पहले ही की थी पूजा सिंघल के भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की मांग

विनोद सिंह ने लिखा: मुझे 2010 से 2014 के अंतिम दो विधानसभा सत्र चित्रपट की तरह याद है जब भी उक्त घोटाला से सम्बंधित हमारा प्रश्न सूची में रहता था तो उसका नम्बर आने से पहले किसी और सवाल पर हंगामा हो कर सदन स्थगित हो जाता

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रांची: झारखंड के जिस आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल पुरवार के यहाँ ईडी के छापे में करोड़ों कैश मिला है, उनकी शिकायत बगोदर के माले विधायक विनोद सिंह 11 साल पहले कर चुके हैं, विधानसभा में। कार्रवाई तो हुई नहीं, पर विनोद सिंह ने पूजा सिंघल के भ्रष्टाचार का मामला कई बार उठाया था। उनकी कार्यशैली पर चतरा, खूंटी, पलामू, जहाँ भी रही हर बार सवाल उठा, एक जाँच जिसे हजारीबाग उपायुक्त रहते नितिन मदन कुलकर्णी ने किया था और जिसे विधायक सही मानते हैं, उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

आज माले विधायक ने लिखा है इस बारे में अपने फेसबुक पोस्ट पे, पढ़ें:

शायद 2011 की बात है। मैं विधानसभा समिति के स्थल निरीक्षण में चतरा गया हुआ था। हमारे साथ समिति में अरूप चटर्जी और जनार्दन पासवान भी थे। जिला में समीक्षा के दौरान मैंने देखा कि मनरेगा की योजना में दो NGO को तत्कालीन उपायुक्त पूजा सिंघल के द्वारा करोड़ो रूपये अग्रिम भुगतान किए गए हैं। जबकि कार्य रिपोर्ट में कार्य की तस्वीर नहीं दिख रही थी। कुछ आधी अधूरी थी। मैंने स्थानीय विधायक जनार्दन जी से बात की, उन्होंने भी शंका जताई।

फिर हम तीनों ने कुछ गांव जाकर निरीक्षण का फैसला लिया। कई योजना धरातल में थी ही नहीं, कुछ कुआँ आधे अधूरे मिले भी तो उनका भुगतान मजदूरों को नहीं मिला। एक किसान ने अपना सर दिखाया कि मजदूरी भुगतान नही होने के कारण मजदूरों ने उनका सर फोड़ दिया। जबकि उन सभी योजना के नाम पर निकासी हो चुकी थी। आकर हम सभी ने एक संक्षिप्त रिपोर्ट विधान सभा में दिया, ग्रामीण विकास विभाग को सौंपा, और एक उच्चस्तरीय जाँच की मांग की। जाहिर है रिपोर्ट ठंढे बस्ते में रही।

लेकिन फिर मैंने अपने जाँच के तथ्यों पर विधानसभा में सवाल उठाया, और अंततः तत्कालीन आयुक्त हजारीबाग नितिन मदन कुलकर्णी को हमारे सवाल पर जाँच के लिए सौपा गया। उन्होंने अपनी जाँच में पूर्ण रूप से पूजा सिंघल को जिम्मेवार माना। इसी मध्य खूंटी से एक मनरेगा घोटाला की रिपोर्ट आई, उस समय भी वहाँ की उपायुक्त पूजा सिंघल थी, हमारे प्रश्न पर राम विनोद सिन्हा पर तो FIR हुआ लेकिन वरीय अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई।

तब तक पलामू में भी क्रय में गड़बड़ी की शिकायत आई। फिर मैंने सरकार से प्रश्न पूछा कि आयुक्त हजारीबाग के रिपोर्ट पर कार्रवाई क्यो नहीं तो सरकार ने कहा कार्मिक विभाग समीक्षा कर रही है। मुझे 2010 से 2014 के अंतिम दो विधानसभा सत्र चित्रपट की तरह याद है जब भी उक्त घोटाला से सम्बंधित हमारा प्रश्न सूची में रहता था तो उसका नम्बर आने से पहले किसी और सवाल पर हंगामा हो कर सदन स्थगित हो जाता।

पिछले विधानसभा के रघुबर दास जी के कार्यकाल में अरूप चटर्जी ने भी मामले को उठाने की कोशिश की। लेकिन सरकार टालती रही। बल्कि नितीन मदन कुलकर्णी के जाँच रिपोर्ट के आधार पर करवाई करने के बजाय एक और जाँच कराकर उस पर लीपापोती की गई। क्लीन चिट दी गयी।

और अंततः आज के छापे के बाद स्प्ष्ट है कि सरकारों ने हमेशा भ्रस्ट अधिकारियों के बचाव का काम ही किया है।अपनी जरूरत के हिसाब से करवाई की है। वर्तमान सरकार अब भी सचेत हो और लंबित मामलों पर करवाई करे।

“सबसे खास बात ये है कि, नितिन कुलकर्णी के रिपोर्ट पे तो कार्रवाई नहीं की गई, और इन्हें बचाने के लिए एक दूसरी जाँच बैठा दी गई थी, जिसके वजह से ये आज तक कार्रवाई से बचती रहीं।” विनोद सिंह ने ईन्यूज़रूम को बताया।

उन्होने आगे कहा, “अभी भी जो छापे हो रहे, इसमे सिर्फ पैसे इतने हैं ये पता चला है, जिसे सफ़ेद साबित करना इस रसूख के अधिकारियों के लिए बड़ी बात नहीं है। कार्रवाई तो सही तब मानी जाएगी जब, किस-किस तरीके से ये पैसे आये इसकी जाँच और सजा हो।”

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