सीबीएसई सिलेबस में कटौती पर झामुमो विधायक एवम झारखंड अधिविद्य परिषद सदस्य को आपत्ति

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री को पत्र लिख कर कहा कि कुछ समय से देश में धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और संघवाद जैसे विषयों पर अलग विचार थोपने की सचेत कोशिश दिखाई पड़ रही है

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रांची: झामुमो विधायक सुदिव्य कुमार ने सीबीएसई (CBSE) सिलेबस में कटौती पर गहरी आपत्ति जताई है। उन्होंने केंद्रीय मानव संसाधन (HRD) मंत्री रमेश पोखरियाल को पत्र लिखकर सिलेबस में कटौती को फौरन वापस लेने की मांग की है। गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार को हाल ही में झारखंड अधिविद्य परिषद का सदस्य भी मनोनीत किया गया है।

श्री कुमार ने लिखा है कि कोरोना महामारी और लाॅकडाउन के आलोक में सीबीएसई द्वारा कक्षा 9 से 12 तक के सिलेबस में कटौती की गई है। मौजूदा सत्र में ऐसा करना व्यावहारिक तौर पर जरूरी है। लेकिन मुझे हैरानी है कि पाठ्यक्रम में कटौती हेतु विषयों के चयन में भाजपा की एकांगी, असंवैधानिक, अलोकतांत्रिक और सांप्रदायिक राजनीतिक दृष्टि को आधार बनाया गया है। यह देखने योग्य विषय है कि आपने किन विषयों को अनावश्यक समझा है।

झामुमो विधायक सुदिव्य कुमार ने पत्र में लिखा है कि नवीं कक्षा के पाठ्यक्रम से ’लोकतांत्रिक अधिकार’ को हटाया गया है। क्या भारत में बच्चों को लोकतंत्र की शिक्षा से वंचित किया जाएगा? कोरोना संकट में जब भुखमरी बढ़ रही है, तब ’भारत में खाद्य सुरक्षा’ को भी सिलेबस से हटाना भी हैरानी की बात है। कक्षा 10 के पाठ्यक्रम से ’लोकतंत्र और विविधता’, ’लिंग, धर्म और जाति’, ’लोकप्रिय संघर्ष और आंदोलन’ और ’लोकतंत्र के लिए चुनौतियां’ को हटाया गया है।

पत्र के अनुसार कक्षा 11 के राजनीति विज्ञान के पाठ्यक्रम से संघवाद, नागरिकता, राष्ट्रवाद और धर्मनिरपेक्षता को हटाया गया है। बारहवीं कक्षा में राजनीति विज्ञान के पाठ्यक्रम से ’भारत में सामाजिक और नव-सामाजिक आंदोलन’ तथा ’क्षेत्रीय आकांक्षाओं’ हटाया गया है। जबकि झारखंड जैसे राज्यों में राष्ट्रीयता और अस्मिता की लड़ाई का काफी महत्व है। इनकी शिक्षा से बच्चों को भला क्यों वंचित किया जा रहा है? बारहवीं कक्षा के पाठ्यक्रम से भारत-पाक विभाजन की समझ को भी हटाया गया है।

विधायक सुदिव्य कुमार ने लिखा है कि कुछ समय से देश में धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और संघवाद जैसे विषयों पर अलग विचार थोपने की सचेत कोशिश दिखाई पड़ रही है। इस क्रम में सांप्रदायिक, असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक विचारों को बढ़ावा दिया जा रहा है। मीडिया के एक हिस्से को प्रभाव में लेकर तथा सोशल मीडिया का दुरूपयोग करते हुए नागरिकों, खासकर नई पीढ़ी को गुमराह किया जा रहा है। इसे व्हाट्सअप यूनिवर्सिटी का ज्ञान बताया जा रहा है। ऐसे में यह जरूरी है कि हम अपने सिलेबस में बच्चों को इन विषयों की समुचित जानकारी दें।

सुदिव्य कुमार के अनुसार भारत का संविधान ’संघवाद’ की भावना पर आधारित है। लेकिन माननीय प्रधानमंत्री तथा भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री अक्सर ’डबल इंजन’ की सरकार की डींग हांकते हैं। उनका आशय यह होता है कि केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार हो, तो राज्य पर केंद्र की विशेष मेहरबानी होगी। यह असंवैधानिक बात है, जिसकी समझ बच्चों में पैदा हो, इसके लिए उन्हें ’संघवाद’ की शिक्षा देना उतना ही जरूरी है, जितना धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र की समझ विकसित करना।

श्री कुमार ने आरोप लगाया है कि पांच साल तक रघुवर दास की डबल इंजन सरकार का कोई लाभ झारखंड को नहीं मिला। उल्टे, उस दौरान राज्य के हजारों स्कूलों को बंद करके सरकारी शिक्षा को तबाह कर दिया गया। अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तथा शिक्षामंत्री जगरनाथ महतो के नेतृत्व में हम पर राज्य में बर्बाद स्कूली शिक्षा को फिर से संवारने की बड़ी चुनौती है। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री होने के नाते आप इस दिशा में कोई विशेष मदद कर सकें, तो झारखंड आपका आभारी होगा।

श्री कुमार ने आशा जताई है कि इस पत्र के आलोक में केंद्र सरकार उचित कदम उठाएगी।

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