अन्य राज्यों में फंसे झारखंड के मजदूरों और स्टूडेंट्स की उचित व्यवस्था करे केंद्र एवं राज्य सरकारें: विनोद सिंह

केंद्र तथा संबंधित राज्य सरकारों के अलावा झारखंड सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। उन शहरों में विशेष शिविर लगाकर रहने और भोजन का इंतजाम किया जाए। रोजगार छिन जाने के कारण समुचित आर्थिक सहायता भी दी जाए

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रांची: पूरे दुनिया के साथ भारत में भी कोरोना वाइरस संकट से उत्पन्न हुए हालात पे उठाए गए कदमों के बीच भाकपा माले विधायक विनोद सिंह ने अन्य राज्यों में फंसे मजदूरों के लिए एक प्रेस रिलीज़ जारी कर उचित व्यवस्था की मांग की है। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण रोकने के लिए लॉक डाउन जरूरी है। लेकिन विभिन्न राज्यों में फंसे झारखंड के स्टूडेंट्स और मजदूरों को उनके बुरे हाल पर छोड़ देना ठीक नहीं।

माले विधायक ने कहा कि कारखाने, मॉल, व्यवसाय और शिक्षण संस्थान बंद होने के कारण विभिन्न राज्यों में गए स्टूडेंट्स और मजदूरों को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रहा है। ज्यादातर मजदूरों के पास स्वतंत्र आवासीय व्यवस्था नहीं है। वे उन कारखानों, अपार्टमेंट, रेस्टोरेंट इत्यादि में ही किसी तरह रात गुजारकर दिन में नौकरी करते हैं। ऐसे तमाम संस्थान बंद होने के कारण उनके पास रहने की कोई जगह नहीं बची है। रोजगार के अभाव में उनके पास आर्थिक परेशानी भी है। ट्रेन और बसें बंद होने के कारण वापस नहीं लौट पा रहे हैं। इनमें कुछ लोग किसी तरह वापस आ रहे हैं। इससे संक्रमण का खतरा भी बढ़ रहा है।

इसलिए केंद्र तथा संबंधित राज्य सरकारों के अलावा झारखंड सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। उन शहरों में विशेष शिविर लगाकर रहने और भोजन का इंतजाम किया जाए। रोजगार छिन जाने के कारण समुचित आर्थिक सहायता भी दी जाए। ऐसा नहीं किया गया तो उन राज्यों में फुटपाथ या झुग्गियों में बेहद असुरक्षित स्थितियों में रहते हुए उन्हें कोरोना संक्रमण का शिकार होना पड़ेगा। साथ ही, जिन्हें किसी वजह से झारखंड लौटना बेहद जरूरी हो, उनके स्वास्थ्य की जांच करके विशेष ट्रेन और बसों के माध्यम से इन्हें वापस लाया जाए। ऐसा नहीं होने पर उन्हें असुरक्षित स्थिति में रहते हुए कोरोना संक्रमण का शिकार होना पड़ेगा। साथ ही वे लोग किसी तरह वापस लौटकर झारखंड में भी संक्रमण का खतरा पैदा करेंगे।

विनोद सिंह ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सर्वदलीय बैठक करके सभी विकल्पों पर विचार करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार ने कोरोना महामारी से निपटने के लिए 200 करोड़ के बजट का प्रावधान किया है। इस राशि से यह प्रबंध किया जा सकता है।

माले विधायक विनोद सिंह के अनुसार अचानक ट्रेनों और बसों को रद्द कर देने से झारखंड के लाखों मजदूर और स्टूडेंट्स विभिन्न राज्यों में फंसे हुए हैं। इनमें कुछ लोग इनमें कुछ लोग छोटे वाहनों से विभिन्न रास्तों से झारखंड के अपने जिलों में लौट रहे हैं। इनकी कोई स्वास्थ्य जांच नहीं होने के कारण झारखंड में कोरोना वायरस फैलने का खतरा बढ़ा है।

विनोद सिंह के अनुसार ऐसे लोगों के लिए अब तक कोई योजना नहीं बन पाना दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रधानमंत्री को इन विषयों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए था। लेकिन उन्होंने सिर्फ लोगों को घरों पर रहने तथा घर से काम करने का उपदेश देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री समझ ली। उन्होंने यह नहीं बताया कि ऐसे लोगों का क्या होगा जो अपने घरों से बाहर अन्य राज्यों में रहकर काम कर रहे हैं। वहां उन्हें संबंधित संस्थान द्वारा उपलब्ध कराए गए आवास से वंचित कर दिया गया है। स्टूडेंट्स को भी हॉस्टल से निकाल दिया गया है। उन सबकी कोई चिंता नहीं किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।

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