रमजान के परिवार से राहुल गांधी व अशोक गहलोत को कब मिलने की फूर्सत मिलेगी?

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जयपुर। राजस्थान के अलवर जिले मे एक युवती के साथ गैंगरेप करने की घटना जब अखबारों की प्रमुख सूर्खियां बनीं तो राज्य सरकार ने पीड़ित को सरकारी नौकरी व अपराधियों की तुरंत गिरफ्तारी के अतिरिक्त जिले में दो पुलिस अधीक्षक लगाने सहित अनेक तरह के आदेश जारी करने के अलावा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट सहित अनेक नेताओं को साथ लेकर पीड़ित युवती के घर जाकर मिलने को एक अच्छा प्रयास माना जा रहा है। लेकिन पिछले महिने बांरा जिले के निवासी कैदी रमजान के इलाज के लिये कैदी वार्ड में भर्ती को पुलिस गार्डों पाईप से पीट पीटकर मारने की घटना के आहत परिवार से मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री व राहुल गांधी मिलकर उनको भी इंसाफ दिलाने की बात कह देते तो बेहतर होता।

27 अप्रेल को केंद्रीय कारागृह कोटा से थाना महावीर नगर में जिला कारागृह बांरा के दण्डित बन्दी की मृत्यु की सूचना प्राप्त हुई है। मोहम्मद रमजान (52) को बीमार होने के कारण उपचार के लिए न्यू मेडिकल कॉलेज कोटा के कैदी वार्ड में भर्ती किया गया था। बन्दी का 19 अप्रेल न्यू मेडिकल कॉलेज कोटा के कैदी वार्ड में उपचार करवाया जा रहा था। न्यू मेडिकल कॉलेज से रमजान को 21 अप्रेल को उपचार के लिए एसएमएस हॉस्पीटल, जयपुर रेफर किया गया। उपचार उपरान्त बन्दी को 26 अप्रेल को  एसएमएस हॉस्पीटल से पुनः न्यू मेडिकल कॉलेज कैदी वार्ड कोटा में भर्ती करवाया गया। कैदी की तबीयत ज्यादा खराब होने पर उसे आई.सी.यू वार्ड में शिफ्ट किया गया व रात्रि 10.50 बजे डॉक्टर द्वारा बन्दी को मृत घोषित कर दिया गया।

उल्लेखनीय है कि दंडित बंदी रमजान जिला कारागार बारां में 28 अगस्त 2018 से सजा भुगत रहा था। वह जिला कारागार बारां में प्रवेश से पूर्व भी गंभीर बीमारी से ग्रसित था। बंदी का चिकित्सा अधिकारियों की राय के अनुसार उपाधीक्षक जिला कारागार बारां द्वारा नियमित रूप से उपचार करवाया जा रहा था। बंदी रमजान को जेल ओपीडी, राजकीय चिकित्सालय बारां और फिर न्यू मेडिकल कॉलेज कोटा में कई बार उपचार करवाया गया। लीवर एवं डायबिटीज के जांच हेतु 7 मार्च से 21 मार्च तक 15 दिन का पैरोल स्वीकृत हुआ। पैरोल अवधि के समाप्ति के बाद बारां जेल में दाखिल होने के पश्चात बंदी की स्थिति अनुसार उपचार हेतु राजकीय चिकित्सालय में भिजवाया गया व 23 मार्च को उपचार हेतु राजकीय चिकित्सालय बारां द्वारा न्यू मेडिकल कॉलेज कोटा के लिए रेफर किया गया। केंद्रीय कारागृह कोटा की इस रिपोर्ट पर मर्ग संख्या 9/2019 अन्तर्गत धारा 176 दप्रस थाना महावीर नगर जिला कोटा शहर पर दर्ज की गयी।

राजस्थान मे सौ विधायक कांग्रेस, तेरह निर्दलीय विधायक, छह बसपा व दो माकपा व भाजपा के मिलाकर कुल दो सौ विधायकों के अलावा, पच्चीस लोकसभा व दस राज्य सभा के सदस्यों मे से किसी एक का भी अभी तक रमजान की मौत पर दिल नही पसीजा है। रमजान के परिजनों को इंसाफ व मौत के जिम्मेदारों को सजा दिलाने के लिए एक भी आवाज अभी तक नही निकल पाई है। दो सौ विधायकों मे आठ मुस्लिम विधायक भी हैं जो इस मामले में चुप हैं।

अशोक गहलोत की पिछली सरकार के कार्यकाल मे सवाईमाधोपुर जिले मे सीकर के खीरवा गावं निवासी होनहार पुलिस अधिकारी फूल मोहम्मद को जिंदा चलाने के बाद आज तक अशोक गहलोत सरकार मे मुख्यमंत्री रहते व हटने के बाद सांत्वना तक देने फूल मोहम्मद के घर तक नही गए। दूसरी तरफ पिछले जेलकर्मियों द्वारा जयपुर जैल मे बंदियों के साथ बूरी तरह मारपीट करने की शिकायत उनके परिजनों ने सरकार तक पहुंचाने के बावजूद उस मामले मे भी कुछ भी नही हुआ।

मांगरोल के मृतक रमजान के गरीब व असहाय परिवार अब इंसाफ पाने के लिये जद्दोजहद करते नजर आने के अलावा उन तक सरकार का न कोई नूमाईंदा और न ही मुख्यमंत्री को जाकर सांत्वना देने की फुर्सत मिली है। और न ही रमजान की मौत अब तक अखबारों की सुर्खियां बन पा रही हैं। कुछ लोग तो यहां तक कहते हैं कि रमजान अल्पसंख्यक समुदाय से हैं तो मुख्यमंत्री व राहुल गांधी का उसके घर जाना कैसे सम्भव हो सकता है।

 

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