कांग्रेस यूनियन ऑफ स्टेट देश को जिंदा रखती है, लेकिन भाजपा उस पर ही हमला करती है: राहुल गांधी

आरपीएन सिंह के कांग्रेस छोड़ने के बाद पार्टी कि झारखंड इकाई कि पहली बड़ी मीटिंग गिरिडीह में हुई, जिसमे भाजपा पर हमला करते हुए काँग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि बीजेपी का कांसेप्ट गलत है। जबकि कांग्रेस यूनियन ऑफ स्टेट देश को जिंदा रखती है, लेकिन भाजपा उस पर ही हमला करती है। अगर इस तरह के हमले करते जाएंगे तो बाहरी शक्तियां लाभ उठाएंगी और चीन ने वही किया है। लद्दाख में अपनी सेना बैठा दी है। उसने अरुणाचल प्रदेश में भी डिस्टरवेंस पैदा करना शुरू कर दिया है

Date:

Share post:

गिरिडीह: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि कहा कि भारत की सबसे पुरानी पार्टी की विचारधारा सभी को साथ लेकर चलने की रही है। और यह कांग्रेस के डीएनए में है। राहुल गांधी मधुबन, गिरिडीह में आयोजित तीन दिवसीय चिंतन शिविर के आखिरी दिन कांग्रेसजनों को वर्चुअल माध्यम से संबोधित कर रहे थे।

ये शिविर, आरपीएन सिंह, जो झारखंड काँग्रेस के प्रभार में थे, के पार्टी छोड़ने के बाद पहली अहम बैठक थी।

मौके पे राहुल गांधी ने कहा कि राज्यों के गठन से देश बनता है। देश के सभी प्रदेशों की अपनी परम्परा, सस्कृति  और इतिहास है। हिंदुस्तान में छोटा-बड़ा कोई भी प्रदेश हो, हमारे लिए सबका महत्व एक समान है।

उन्होंने कहा कि झारखंड, उत्तर प्रदेश से छोटा जरूर है, लेकिन इसका एक अलग इतिहास और अनूठा कल्चर है। यहां अलग अलग धर्म और विभिन्न जातियों के लोग निवास करते हैं कई भाषाएं बोली जाती हैं।  उन्होने झार२वंड कांग्रेस पार्टी कार्यकर्ताओं का अहवान किया कि आप सब को इस राज्य के संस्कृति की रक्षा करने की जरूरत है। सभी कांग्रेसी मिलकर  इस प्रदेश की आत्मा और डीएनए की रक्षा करें। बीजेपी और आरएसएस झारखंड में ऊपर से एक अलग विचारधारा थोपना चाहती है। शिक्षण संस्थानों की विचारधारा भी प्रभावितr करना चाहती है। जिसेसे बचाने की जरूरत हैा सिर्फ कांग्रेस ही यूनियन ऑफ स्टेट की रक्षा करती हैा उन्होंने कहा कि झारखंड में कांग्रेस सरकार में हैं तो बेहतर काम भी करें।

उन्होंने मंत्रियों से कहा कि अपनी सरकार में बेहतर काम करें.देश को दिखाएं कि आदिवासी और गरीबों के लिए बेहतर काम हो रहा है। झारखंड में पार्टी को जड़ से मजबूत करें और यह काम आसान नहीं है, इसका ख्याल रखें। राहुल गांधी ने प्रदेश कांग्रेस के चिंतन शिविर की सराहना करते हुए कहा की पार्टी सगंठन मजबूत करने की दिशा में अच्छी पहल है।

भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि बीजेपी का कांसेप्ट गलत है। जबकि कांग्रेस यूनियन ऑफ स्टेट देश को जिंदा रखती है, लेकिन भाजपा उस पर ही हमला करती है। अगर इस तरह के हमले करते जाएंगे तो बाहरी शक्तियां लाभ उठाएंगी।चीन ने वही किया है और लद्दाख में अपनी सेना बैठा दी है। उसने अरुणाचल प्रदेश में भी डिस्टरवेंस पैदा करना शुरू कर दिया है।

अपने ही सरकार पे सवाल

तीन दिन के इस शिविर कि खास बात ये रही कि जहाँ पार्टी के नेताओं ने झारखंड सरकार के साथ कॉमन मिनीमुम प्रोग्राम को पूरी तरह लागू करने कि बात करी, वहीं ईटीवी बिहार-झारखंड के अनुसार, विधायक दीपिका पाण्डेय और मंत्री बन्ना गुप्ता ने हेमंत सोरेन सरकार के काम काज़ पे सवाल उठाया और बोला के कांग्रेस को इससे नुकसान हो रहा है।

नए प्रभारी अविनाश पांडे ने कहा की राज्य भर से पार्टी डेलीगेटों के सुझाव के बाद पार्टी ने फैसला लिया है हेमंत सरकार में कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के माध्यम से कांग्रेस अपने उन सभी एजेंडा को लागू करेगी। जो चुनाव में मैनिफेस्टो के जरिए इस राज्य की जनता से वादा किया था। और शीध्र राज्य में पंचायत चुनाव कराकर पंचायती राज व्यवस्था को मजबूती देने का काम करेगी। पिछड़ों से किया गया 27 फीसदी का आरक्षण का वादा भी दो सालों में से लटका है। जिसे कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के जरिए पूरा कराना मकसद है।

spot_img

Related articles

Stroke Rehabilitation: Rebuilding Lives After a Brain Attack

Reactions to a stroke are typically limited to the emergency phase—recognising the warning signs such as weakness on...

Bulldozers, Evictions and Fear: The Human Cost of Bengal’s New Governance

Just a month has passed since the new government came to power in West Bengal, but for many...

चुनावी सूचियों में बदलाव—झारखंड के हाशिए पर खड़े नागरिकों के लिए वजूद की जंग

झारखंड में विशेष सघन पुनरीक्षण सिर्फ़ वोटर लिस्ट का मामला नहीं है। सवाल यह है कि क्या प्रवासी, आदिवासी और हाशिये पर खड़े लोग बिना डर अपने अधिकार बचा पाएंगे।

Jharkhand’s Biggest Democratic Test Yet: The SIR Challenge

Jharkhand's SIR will cover 2.64 crore voters in a state marked by migration, displacement and tribal populations, raising questions about inclusion, documentation and the protection of voting rights.