राहुल गांधी भारत को समझना चाहते हैं, यह भी महत्वपूर्ण है कि भारत राहुल को समझे

राहुल: बिलकुल नहीं। मेरी तुलना (गांधी जी) से न करें। मेरे पास अपने बारे में कोई गलत धारणा नहीं है। यह मैं अपने लिए कर रहा हूं.. यह मेरी तपस्या है। मुझे भारत की विविधता को समझना होगा

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Darshan Mondkar
Darshan Mondkar
runs a manufacturing MSME, and loves narrating tales which turn the political and social into the personal. He is especially known for his disclaimers.

राहुल गांधी से भारत जोड़ो यात्रा के दौरान मेरी बातचीत (अंतिम):

राहुल: महात्मा गांधी ने पूरे भारत की यात्रा की, क्या आप जानते हैं कि उन्होंने ऐसा क्यों किया?

मैं: अंग्रेजों से लड़ने और हमारे देश को आजाद कराने के लिए।

राहुल: नहीं, क्योंकि वह भारत को समझना चाहता थे। भारत जटिल है, कोई भी दो भाग समान नहीं हैं। पूरे भारत में लोगों की समस्याएं अलग हैं। उनकी आकांक्षाएं अलग हैं। मुझे इसे समझना होगा।

मैं: तो, एक गांधी भारत में फिर से चल रहा है?

राहुल: बिलकुल नहीं। तुलना भी न करें। मेरे पास अपने बारे में कोई गलत धारणा नहीं है। यह मैं अपने लिए कर रहा हूं.. यह मेरी तपस्या है। मुझे भारत की विविधता को समझना होगा।

मैं: समझ में आता है।

राहुल: जब मैं भारत के सबसे बड़े शहर से लेकर सबसे छोटे गांव तक के विभिन्न पहलुओं को समझूंगा, तब मुझे भारत की नब्ज सही मायने में समझ में आएगी। यह मेरी सीख है।

मैं: और इस प्रक्रिया में वोट मिलेंगे?

राहुल: मैं इसलिए नहीं चल रहा हूं, लेकिन अगर हां, तो क्यों नहीं। पहली चीज जो मुझे करनी है वह है मेरी तपस्या (चलना) और मुझे विश्वास है कि मैं इसे कर सकता हूं।

मैं: मुझे भी विश्वास है कि आप ऐसा कर सकते हैं, हम सबको है।

राहुल: ‘मुस्कुराते हुए’

मैं: धन्यवाद राहुल सर, आपने मुझे जो समय दिया और मेरे साथ इतनी खुली बातचीत की। आप सच में बात करने में बहुत अच्छे हो।

हमने हाथ मिलाया और मैं सावधानी से सुरक्षा घेरे से बाहर निकल गया
और फिर मैंने एक संकल्प किया कि मैं राहुल गांधी के बारे में लिखूंगा …

जबकि राहुल भारत को समझना चाहते हैं, यह भी महत्वपूर्ण है कि भारत राहुल को समझे, इससे परे कि मीडिया और उनके खिलाफ प्रचार उन्हें किस रूप में चित्रित करना चाहता है।

मुझे उम्मीद है कि राहुल के साथ मेरी बातचीत के बारे में मेरी पोस्ट ने इसमें थोड़ी मदद की होगी और उन्हें समझने में फर्क पड़ेगा।

मैं यह भी अच्छा कर सकता हूं किसी ऐसे व्यक्ति के लिए कर सकता हूं जो पूरे भारत में 3,500 किलोमीटर तक लगातार चल रहा है और मुझे उम्मीद है कि वह अपनी तपस्या में सफल होगा।

 

ये लेख अँग्रेजी में थी, इसे विवेक लेखी ने अनुवाद किया है।

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