भीड़ बाहर से आयी और पुलिस अगर चाहती तो ये सब रुक जाता, पर सबसे बड़ी भूमिका पुलिस की ही रही हिंसा मे- फ़ैक्ट फिंडिंग रिपोर्ट

Date:

Share post:

दिल्ली: दिल्ली सांप्रदायिक हिंसा (Delhi Riots) कई मजदूर संगठनों के कार्यकर्ताओं ने दिनांक 27, 28 व 29 फरवरी को हिंसाग्रस्त इलाकों में पहुंचकर प्रभावित लोगों का दर्द बांटने, जरूरी इमदाद बांटने और हिंसा का जायजा लेने का प्रयास किया। इनके अनुभव को हम यहां साझा कर रहे हैं।

दंगा ग्रस्त दिल्ली के जाफराबाद, चांदबाग, खजूरीखास व यमुनाविहार में घूमने तथा वहां के साथियों से बात करने के बाद हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि यहां दंगा नहीं हुआ। जो हुआ वह पुलिस के सहयोग से संगठित संघी गुंडा गिरोह का हमला था। हमलावर बाहर के थे। सीएए, एनआरसी और एनपीआर विरोधी आन्दोलन ने जनता को काफी सचेत और अनुशासित किया है। सभी मुस्लिम बहुल इलाके में रहने वाले हिन्दू परिवार निडरता और भरोसे से रह रहे हैं, इनका किसी तरह का कोई नुकसान न हो इसके लिये दिन-रात पहरा दिया गया। मुस्लिम महिलाओं ने मानव श्रृंखला बनाकर एक मंदिर को बचाया। हिन्दू इलाके में भी इसी तरह की घटना सुनने को मिली। मुस्लिम समुदाय की तरफ से केवल रक्षात्मक बचाव किया गया। 2002 के गुजरात दंगों और 2020 के दिल्ली दंगों में अंतर कोई था तो वह था कि पुलिस और संघी गुंडे एक हो चुके थे और निर्लज्जता की सारी हदें पार कर गये थे। यहां तक कि ड्रेसें भी एक-दूसरे की पहन रहे थे और वर्दी भी दंगाई थी।

शिव विहार मोहल्ले में मुस्लिम समुदाय के घर जला दिए गये लेकिन हिन्दू पड़ोसियों ने उन्हें जान पर खेलकर छिपाया और सुरक्षित निकालने में मदद दी। मुस्लिम मोहल्लों में एक भी हिंदू और मंदिरों को आंच नहीं आई।

खजूरीखास में मुसलमानों की दुकानें जलाई गईं पर बगल की हिन्दू दुकान छोड़कर। इस सांप्रदायिक हिंसा के सम्बन्ध में यह कहा जा सकता है कि जितने हिंदू मरेंगे उतना बीजेपी को फायदा होगा क्योंकि उससे हिंदू डरकर बीजेपी को वोट देंगे। आईबी अधिकारी अंकित शर्मा का कत्ल सरकार के इशारे पर हिंदुत्व के गुंड़ों द्वारा ‘जय श्री राम’ के नारे लगाते हुए किया गया। ताहिर खान को सरकार मुसलमान होने के नाते बदनाम कर मुसलमानों के खिलाफ नफरत भड़काने के लिए साजिशन पूरा षड््यंत्र रच रही है। सरकार के पैसों से चलने वाले ज़ी टीवी और दूसरे चैनल जान बूझकर झूठ फैला रहे हैं। इस हिंसा में मुसलमानों ने हिंदू मंदिरों की रक्षा की। उनकी दुकानें जला दी गईं उसके बावजूद उन्होंने हिंदुओं के घरों की और मंदिरों की हिफाजत की है। भाजपा का इरादा बहुत बड़ी हिंसा करने का था लेकिन सोशल मीडिया पर लगातार वीडियो आने और बात के सामने आते जाने के कारण भाजपा इस बार इतनी बड़ी तादाद में हत्या नहीं करवा सकी। लेकिन भाजपा लगातार और दंगा करने की कोशिश में लगी हुई है।

अब सरकार सीएए (CAA) का विरोध करने वाली मुस्लिम औरतों और नौजवानों को डराना-धमकाना और उन्हें फर्जी केसों में फंसाने की धमकी दे रही है। शाहीन बाग और उस तरह के सैकड़ों प्रदर्शनों में जो मुस्लिम महिलाओं एवं युवाओं का नेतृत्व उभर कर सामने आया और उसने संविधान, लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता की रक्षा करने का जो संकल्प देश के सामने पेश किया है, उससे भाजपा बुरी तरह घबरा गई है। भाजपा द्वारा मुसलमानों के खिलाफ जो नकारात्मक आतंकवादी की छवि और उनके खिलाफ जो माहौल बनाया जाता रहा है, मुस्लिम औरतों ने शाहीन बाग जैसे प्रदर्शनों के जरिए भाजपा द्वारा बनाई गई मुसलमानों की छवि को बिल्कुल बदल दिया था। इसलिए यह दंगे करके शाहीन बाग आंदोलन को बुरी तरह से कुचलने और मुसलमानों की सुधरती हुई छवि की प्रक्रिया को रोकने के लिए भाजपा द्वारा कराए।

इस समय कपिल मिश्रा को हटा कर मीडिया ने ताहिर हुसैन को दंगे का असली खलनायक सिद्ध करने के लिए अपने सारे कैमरे वहीं स्थिर कर लिए हैं। मुस्लिम बहुल इलाकों के सारे मंदिर सुरक्षित खड़े हैं और उन मंदिर की सुरक्षा के लिए वहां के पुजारी मुसलमानों को श्रेय दे रहे हैं तो जली हुई दरगाह और उजड़ी मस्ज़िदों की जिम्मेदारी किसकी बनती है, ये सवाल आज खुद से करना होगा। अगर हुसैन के मकान पर स्थिर कैमरे करावल नगर से थोड़ा आगे जा कर खजुरी पहुंचते तो उन्हें गली नं.-4 और गली नंबर 5 दोनों गलियों में तक़रीबन 35 मकान भी दिखते जिन्हें आराम से पुलिस की निगरानी में लूटा गया फिर जला दिया गया और उन्हें एक हिन्दू भी मिलता जो अपने जले घर को बड़ी ठहरी आंखों से देख रहा था। हमारे पूछने पर कि किसने जलाया तो उसने बताया कि डर से उन्होंने भी घर छोड़ दिया था लेकिन अनुमान लगाते हुए कहा ‘‘हिन्दुओं ने ही जलाया होगा।’’ अगर वो थोड़ी और जहमत उठाते हुए नन्हें नगर जाते तो उनका अपने घर से जान बचा कर भागी बदहवास स्त्रियों से जरूर सामना होता जिनका अब सब कुछ खाक कर दिया गया है सिवाय उन फटे कपड़ों के जो उन पर हुए हमलों से फट चुके हैं। हमसे बात करते हुये एक स्त्री अचानक टूट कर बिखर जाती है और जमीन पर दहाड़ें मार-मार कर रोने लगती है। आपको उनकी कहानी जरूर सुननी चाहिए। पर उनकी कहानी ना कोई मीडिया सुनना चाहता है ना कोई सरकार।

अब इस देश में कोई ऐसी संस्था नहीं बची है जिनसे हम कोई उम्मीद कर सकें। सत्ता और मीडिया ने पुलिस, डॉक्टर, आम लोगों और समाजसेवी संस्था में उनके लिए इतनी नफरत भर दी है कि उनके पक्ष में कोई खड़े होने का साहस नहीं कर सकता। आज जो उनके साथ खड़ा होगा वो उनमें शामिल मान लिया जाएगा। उनका भी वही हाल किया जाएगा जो आज मुसलमानों के साथ हो रहा है। पर आज नफरत का जहर जो मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है कल आपके खिलाफ भी इस्तेमाल होगा। ये जहर कभी जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र, नस्ल, अमीरी-गरीबी और भी अलग-अगल पहचान लेकर बार-बार वापस लौटेगा। तब तक अपना शिकार करता रहेगा जब तक आपके पास कुछ बचाने के लिए बचा होगा।

चंदुनगर में नावेद नाम के एक लड़के से बात हुई, उसकी शेरपुर चौक पर मेडिकल और कम्युनिकेशन की दुकान थी। उन्होंने बताया कि उनके कुछ जानने वालों ने उन्हें बता दिया था कि माहौल खराब है, समय से घर चले जाना। उसके मुताबिक 3-4 ट्रक से कुछ लोग आए, उन्होंने अपनी पीठ पर बैग लटका रखे थे, आते ही उन लोगो ने ब्।। के समर्थन में नारे लगाने शुरू कर दिए। उसके थोड़ी देर बाद पथराव शुरू हो गया। वो दुकान बन्द करके भाग गया। उसकी दुकान को आग लगा दी गई, वो बस सड़क की दूसरी तरफ से देखता रहा।

शिव विहार जाने का प्रोग्राम बना लेकिन तभी पता चला कि अल-हिन्द अस्पताल में घायल हुए लोगों को सबसे पहले लाया गया था। वहां एक सज्जन से बात हुई। उन्होंने बताया कि शिव विहार हिन्दू बहुल इलाका है, मुस्लिमों की आबादी बस 3000 है। वहां के मुस्लिमों को स्थानीय हिन्दू लोगों ने अपनी जान पर खेल कर बाहर निकाला और सुरक्षित इलाकों में पहुंचाया है। कुछ हिन्दू परिवारों को शिव विहार में अपने मुस्लिम पड़ोसी या दोस्तों की मदद करने के कारण देशद्रोही घोषित कर दिया गया, उन पर भी हमला हुआ, वो लोग भी अभी बाहर चले गए हैं।

सबसे बड़ी बात जो निकल कर सामने आई वो ये कि स्थानीय लोगों ने एक-दूसरे की मदद की है। हमला करने वाली भीड़ बाहर से आयी थी और पुलिस अगर चाहती तो ये सब पहले ही रुक जाता, सबसे बड़ी भूमिका इसमें पुलिस की रही है।

29 फरवरी को हम लोगों ने चांदबाग से सफर की शुरुआत की। भजनपुरा की मजार से होते हुए हम लोग आगे बढ़ते रहे, रास्ते में जली हुई दुकानों और जले हुए घर थे, कुछ लोग घरों के बाहर थे और पुलिस जगह-जगह तैनात थी। ताहिर हुसैन जो कि आम आदमी के पार्षद हैं और जिन पर आरोप लगाया गया है कि दंगों में उनका हाथ है। उनके वहां पर कुछ लोगों से बात हुई। एक हिन्दू महिला का होटल था उसमें आग लगा दी गई थी। महिला ने बताया कि भीड़ बहुत ज्यादा थी और वो किसी के भी काबू में नहीं थी बस तांडव कर रही थी। उस महिला ने एक पेड़ दिखाया जो कि सड़क पर था और बताया कि इस पेड़ को आप देखो कितने पत्थर और गोलियों के निशान हैं इस पर, उसने बताया कि ताहिर हुसैन के घर की छत पर बहुत सारे लोग थे और गोलियां और पत्थर चल रहे थे।

इसके बाद आगे बढ़कर हम लोग खजुरी एक्स्टेन्शन की गली नंबर 4 में पहुंचे। इस गली में हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही रहते हैं, गली के बाहर जला हुआ सामना पड़ा था। इमरान नाम के एक व्यक्ति ने बताया कि वो इस गली में किराए पर रहता है और उसका घर भी जल गया है, इस गली में सिर्फ मुस्लिम घरों को निशाना बनाया गया, हिन्दुओं के घर को कुछ भी नुकसान नहीं पहुंचा। अधिकतर लोग मजदूर और रोज कमाने वाले हैं, और सभी बिहार से हैं। बताया गया कि सबसे पहले आग मस्जिद में लगाई गई, उसके बाद घरों को निशाना बनाया गया, लोग बहुत मुश्किल से जान बचा कर भागे और अब सब कुछ तबाह हो गया है। सामान सब जल गया है। सरकार की तरफ से घोषणा हुई कि जिसका मकान जल गया है उसको मुआवजा मिलेगा। लेकिन जो किराए पर रह रहा था उसका क्या?

एक लड़के ने बताया कि उसके सभी कागज जल गए हैं, कोई पहचान का कागज नहीं है। कैसे साबित करेगा कि वो यहां का नागरिक है। हमलावर भीड़ में अधिकतर लोग बाहर के थे, लेकिन जिस तरह से मुस्लिम घरों को निशाना बनाया गया उससे लगता है कि या तो पहले रेकी की गई थी या स्थानीय तत्व भी शामिल थे।

चंदू नगर में लोगों ने बताया कि भीड़ ने यहां पर हमला करना चाहा था तो गली में रहने वाले हिन्दू लोग आगे आए और उन्होंने भीड़ को भगाया, सभी लोगों ने मिल-जुल कर इस मुसीबत में साथ दिया। चन्दु नगर में भी मुस्लिम आबादी ज्यादा है। अधिकतर लोग यहां बेल्ट बनाने का काम करते हैं, उसकी वजह से उनके काम पर असर हुआ है। वो सप्लाई नहीं दे पा रहे हैं, आगे उसी गली में 3 हिन्दू परिवार रहते हैं, उनसे बात हुई वो लोग बिल्कुल सुरक्षित हैं, स्थानीय लोगों ने बताया कि इन्हें कोई दिक्कत नहीं आने दी जाएगी क्योंकि अगर इन पर कोई दिक्कत आती है तो लानत है हम पर।

(हिमांशु कुमार, खालिद खान, विशाल, ऋतिक, श्यामवीर, एवम् दीपक की रिपोर्ट के आधार पर)

Related articles

Suspected Cattle Thieves or Victims of Mob Justice? Two Dead, Survivors Arrested in Siliguri

Two men were killed and three critically injured after a mob allegedly attacked five travellers in Siliguri over suspected cattle theft. Police arrested the three survivors and seven others in connection with the violence, while questions remain over what triggered the attack.

गांधी की पत्रकारिता और आज की वायरल दुनिया: मायने क्या रखता है—रीच या असर?

गांधी की पत्रकारिता और आज की वायरल दुनिया के बीच क्या बदला? eNewsroom Conclave में जवाहर सरकार, प्रतीक सिन्हा, राशिद किदवई, अरफा खानम शेरवानी समेत वक्ताओं ने स्वतंत्र मीडिया, एल्गोरिद्म और पत्रकारिता के बदलते सरोकारों पर चर्चा की

Gandhi Had Newspapers. We Have Algorithms. What Would He Make of Today’s Media?

Gandhi had newspapers; today’s journalists have algorithms. At the inaugural eNewsroom Conclave, journalists and public voices explored what happens when clicks, virality and Big Tech influence what people see, while independent media struggles to keep public-interest journalism alive.

Echoes of a Crisis: Why Biswajit Roy’s Tagore and Palestine Still Matter Today

Biswajit Roy’s Palestine, Arab-Jewish Relations and Rabindranath explores Tagore’s ideas on nationalism, imperialism, religion and coexistence. At a time of war and civilian suffering in Gaza, the book offers a deeply humanist lens through which to understand Palestine’s history and the crisis today