झारखंड

झारखंड में भाजपा की शहरी जमीन खिसकी: 48 निकायों के नतीजों ने बदला सियासी समीकरण

झारखंड के 48 शहरी निकाय चुनाव परिणामों में भाजपा को सीमित सफलता मिली। रांची, गिरिडीह और देवघर समेत कई शहरों में झामुमो और निर्दलीय उम्मीदवारों ने मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया।

झारखंड म्युनिसिपल चुनाव 2026: क्या शहरों में भी कमजोर पड़ रही है भाजपा की पकड़?

झारखंड म्युनिसिपल चुनाव 2026 में शहरों से झामुमो की बढ़त के संकेत मिल रहे हैं। कई सीटों पर भाजपा को कड़ी चुनौती है, जबकि रांची और धनबाद में मुकाबला अभी भी बेहद रोमांचक बना हुआ है

म्युनिसिपल चुनाव 2026: कौन हैं शिवम आजाद? राजनीतिक संरक्षण पर उठे सवाल

2026 के म्युनिसिपल चुनाव में गिरिडीह शहर गोलीबारी से दहल गया। वार्ड 18 की घटना के बाद शिवम आजाद चर्चा में हैं, जबकि प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सबका साथ, सबका काम— गिरिडीह मेयर प्रत्याशी प्रमिला मेहरा का वादा

दो बार जिला परिषद सदस्य रह चुकी प्रमिला मेहरा गिरिडीह मेयर चुनाव में मैदान में हैं। उन्होंने पानी, ट्रैफिक और सफाई को प्राथमिकता बताते हुए सबको साथ लेकर चलने का भरोसा दिया।

बगोदर में ‘मैं हूं महेंद्र सिंह’ की गूंज, 21वें शहादत दिवस पर उमड़ा जनसैलाब

बगोदर (झारखंड): “महेंद्र सिंह कौन है?”—यह सवाल 16 जनवरी 2005 को हत्यारों ने किया था। 21 साल बाद...
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बजट 2025 में सामाजिक सुरक्षा, मातृत्व लाभ और शिक्षक भर्ती की जरूरत: झारखंड जनाधिकार महासभा की वित्त मंत्री से मुलाकात

झारखंड में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के भुगतान में देरी से लाखों लोग प्रभावित हो रहे हैं। झारखंड जनाधिकार महासभा ने वित्त मंत्री से इसे ₹1000 से बढ़ाकर ₹2500 करने का सुझाव दिया। साथ ही, शिक्षकों की कमी और बेहतर वेतन के लिए भी सरकार से शीघ्र कदम उठाने की मांग की गई

इंफोसिस से एलएंडटी तक: लंबी ड्यूटी का आह्वान और गिरिडीह के मज़दूरों का हाल

आज 70 घंटे काम करने की बहस जोरों पर है, गिरिडीह के मजदूर अपनी 12 घंटे की शिफ्टों में लंबे समय से काम करने पर मजबूर हैं। स्पंज आयरन फैक्ट्रियों से होने वाला प्रदूषण एक समानांतर संकट बन चुका है, जिससे विरोध और न्याय की मांगें उठ रही हैं। राजनीतिक महत्व के बावजूद, यह ज़िला श्रमिक कानूनों और पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी का एक बड़ा उदाहरण बना हुआ है

हेमंत सोरेन सरकार 2.0: देश को झारखंड मॉडल देने का मौका

फिनलैंड के शिक्षा मॉडल और स्वीडन की स्वास्थ्य प्रणाली से प्रेरित झारखंड, रोजगार और महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता देकर अपने भविष्य की नींव रख सकता है। प्राकृतिक सौंदर्य, पर्यटन, और खेल में सुधार राज्य को देश और विदेश में नई पहचान दिला सकते हैं। आदिवासी अधिकारों और ग्रामीण पलायन रोकने के उपाय झारखंड को विकसित राज्य की श्रेणी में खड़ा कर सकते हैं

झामुमो के ‘गुरु-शिष्य’ की गाथा: सुदिव्य कुमार के संघर्ष और सफलता की कहानी

रांची/गिरिडीह: झारखंड में हेमंत सोरेन 2.0 के मंत्री मण्डल का गठन आज हो गया। कुल 11 मंत्रियों ने पद एवं गोपनियता की शपथ राजभवन...

ऐतिहासिक जनादेश, बड़ी जिम्मेदारी: क्या इस बार हेमंत सरकार मुसलमानों को न्याय, रोजगार और अधिकार दे पाएगी

अब हेमंत सोरेन सरकार से उम्मीद है कि वह अल्पसंख्यकों को न्याय, रोजगार, और शिक्षा के साथ वक्फ बिल और एनआरसी जैसे संवेदनशील मामलों पर ठोस कदम उठाएगी

झारखंड के जीत के चाणक्य: सुदिव्य कुमार सोनू की रणनीतिक कौशल की कहानी

शिबू सोरेन के शिष्य से लेकर झारखंड के चाणक्य तक: झामुमो के प्रति सोनू की अटूट निष्ठा और रणनीतिक कौशल ने भाजपा की मोदी, शाह और मरांडी की तिकड़ी को हराकर पार्टी को 34 सीटों की ऐतिहासिक जीत दिलाने में मदद की। कल्पना सोरेन के उत्थान को सशक्त बनाने से लेकर भगवा खेमे को कमजोर करने वाले दल-बदल की योजना बनाने तक, सोनू के कदमों ने इंडिया ब्लॉक की नींव मजबूत की। उनके कुशल टिकट वितरण और विवेकशील सोशल मीडिया रणनीति ने झारखंड की राजनीति में झामुमो के प्रभुत्व को मजबूत किया
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