पत्रकार रूपेश कुमार सिंह एक दिवसीय भूख हड़ताल करेंगे यतिंद्र नाथ दास की शहादत दिवस पे

जेल से रूपेश ने लिखा: आज हमारा देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, लेकिन आज भी हमारे देश की जेलों की स्थिति बहुत बेहतर नहीं है। आज हमारे देश की जेलें क्षमता से अधिक कैदियों से भरा हुआ है। जेलों में न तो पर्याप्त सिपाही है, और न ही पर्याप्त कर्मचारी। ना तो बंदियों को पौष्टिक भोजन मिलता है, और ना ही बंदी मरीजों को पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधा

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न कुछ सालों का भारत का इतिहास जब लिखा जाएगा तो बड़ा ही विचित्र रहेगा, क्योंकि इन कुछ सालों से जेलें उन लोगों द्वारा भरी जा रही है जो समाज के लिए जी रहे हैं, सामाजिक कार्यकर्ता, वकील, शिक्षक, जनपक्षीय पत्रकार, गायक, प्रोड्यूसर तथा अन्य न्याय पसंद लोगों को जेल भुगतना पड़ रहा है, वह भी अपने जन सरोकार के कारण। सत्ता के द्वारा असहमति की हर आवाज को जेलों में भरा जाने वाला यह समय स्पेशल इतिहास रचेगा।

17 जुलाई 2022 को भी ऐसी ही गिरफ्तारी झारखंड के पत्रकार रूपेश कुमार सिंह की हुई थी, जिसका कारण उनकी जनपक्षीय लेखनी ही है, जिन्हें अभी मंडलकारा सरायकेला में रखा गया है।

रूपेश को जेल के पहले दिन से लेकर अब तक खाने-पीने, रहने, शारीरिक सुरक्षा को लेकर बार-बार सवाल उठाने की जरूरत पड़ती रही है। जेल में भी वे अपनी जनपक्षधरता से दूर नहीं है, और जेल की बदतर व्यवस्था में बदलाव के लिए आवाज उठाने की पहल उन्होंने शुरू कर दी है। हमारे शहीद क्रांतिकारी जतिंद्र नाथ दास उर्फ जतिन दास जिन्होंने अपनी जान की कुर्बानी तक ब्रिटिश काल की बदतर  जेल व्यवस्था के खिलाफ 62 दिनों तक के भूख हड़ताल के कारण दे दी थी, कि शहादत दिवस 13 सितंबर को रुपेश कुमार सिंह सरायकेला जेल की वर्तमान बिगड़ी व्यवस्था में बदलाव के लिए एक दिवसीय भूख हड़ताल करने की घोषणा की है और यदि फिर भी व्यवस्था में बदलाव न किया गया तो शहीद जतिन दास की विरासत को आगे बढ़ाते हुए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे, इस संबंध में रूपेश ने एक आवेदन राष्ट्रपति महोदया के नाम भी लिखा है।

चूंकि रूपेश जेल में बंद हैं इसलिए पत्र उन्होंने जेल सुपरिटेंडेंट को सुपुर्द कर दिया गया है, इस उम्मीद के साथ कि जल्द से जल्द उसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेज दिया जाए।

नीचे रूपेश का आवेदन पत्र दिया गया है जिसे उन्होंने जैसा बताया, वैसा ही लिखा गया है।

सेवा में,

माननीय राष्ट्रपति महोदया, भारत सरकार

द्वारा-जेल अधीक्षिका मंडलकारा सरायकेला,

विषय- जेल में बंदियों को मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने एवं महान क्रांतिकारी अमर शहीद यतींद्र नाथ दास उर्फ जतिन दास के शहादत दिवस 13 सितंबर को जेल में एक दिवसीय भूख हड़ताल करने के संबंध में,

महाशया,

सविनय निवेदन यह है कि मैं रूपेश कुमार सिंह, पिता-अरविंद प्रसाद सिंह, 18 जुलाई 2022 से झारखंड के मंडलकारा सरायकेला में बतौर विचाराधीन बंदी बंद हूं, मैं पेशे से एक पत्रकार हूं, जैसा कि आप जानते हैं कि ब्रिटिश काल में हमारे देश के महान क्रांतिकारी जतिंद्र नाथ दास उर्फ जतिन दास ने तत्कालीन लाहौर जेल में बंदियों के मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने एवं जेल में बंदियों के शोषण के खिलाफ 13 जुलाई 1929 से भूख हड़ताल प्रारंभ किया था, जो अनवरत 62 दिन तक उनके शहादत तक चला, अंततः 13 सितंबर 1929 को बंदियों के अधिकार के लिए भूख हड़ताल के कारण जतिन दास शहीद हो गए।

हमारे देश से अंग्रेजों को गए हुए 75 साल हो गए, आज हमारा देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, लेकिन आज भी हमारे देश की जेलों की स्थिति बहुत बेहतर नहीं है। आज हमारे देश की जेलें क्षमता से अधिक कैदियों से भरा हुआ है। जेलों में न तो पर्याप्त सिपाही है, और न ही पर्याप्त कर्मचारी। जेल कर्मियों को प्रत्येक दिन दो शिफ्ट में लगभग 10 से 11 घंटे ड्यूटी करनी पड़ती है, जो की भारतीय श्रम कानून 8 घंटे कार्य दिवस के खिलाफ है। इन सिपाही को साप्ताहिक छुट्टी भी नहीं मिलती है।

जेल में सबसे बूरी स्थिति विचाराधीन बंदियों की है, छोटे-छोटे मुकदमों में भी उन्हें वर्षों बिना जमानत के जेल में रहना पड़ता है। यहाँ ना तो बंदियों को पौष्टिक भोजन मिलता है, और ना ही बंदी मरीजों को पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधा, यहां नाश्ता में सप्ताह में तीन दिन मूढ़ी-प्याज, तीन दिन चना-प्याज, एक दिन चूड़ा-गूड़ मिलता है। दोपहर भोजन में प्रत्येक दिन चावल, दाल और सब्जी एवं रात के खाने के लिए रोटी, दाल और सब्जी मिलती है (जिसकी गुणवत्ता बिल्कुल बदतर होती है, जिससे पौष्टिकता की उम्मीद नहीं की जा सकती) । हाँ खानापूर्ति के लिए 15 दिन में एक दिन दो पीस मुर्गा का मिट भी मिलता है।

क्या यह बंदियों के लिए पौष्टिक आहार है?

यहां पर कुष्ठ रोगी बंदी एवं एड्स रोगी बंदी को अस्पताल में रखने के बजाय सेल में बंद कर रखा जाता है, क्या यह बंदी मरीजों के मानवाधिकार का उल्लंघन नहीं है?

यहां कैदियों को अपने परिजनों को फोन करने में प्रति मिनट के लिए 2:50 रूपये देना होता है। मुलाकात 15 दिन में एक दिन होता है, जिसमें सिर्फ 10 मिनट बात करने की अनुमति है, क्या यह बंदियों की आर्थिक व मानसिक प्रताड़ना नहीं है?

अतः हम माननीय राष्ट्रपति महोदया से मांग करते हैं कि-

  1. बंदियों को उचित पौष्टिक आहार दिया जाए।
  2. मरीज बंदियों को अस्पताल में रखा जाए।
  3. बंदियों को मुफ्त फोन सुविधा उपलब्ध कराया जाए। झारखंड जैसे राज्य जहां की अधिकांश जनता ग्रामीण क्षेत्र से आती है जो आर्थिक रूप से बेहद कमजोर होते है,टेलीफोन सुविधा के नाम पर प्रति मिनट 2:50 रू अदा करना बहुत ही कष्टदायक है।
  4. मुलाकात सप्ताह में एक दिन किया जाए व कम से कम 20 मिनट बात करने की अनुमति दी जाए।

मैं माननीय राष्ट्रपति महोदया को बताना चाहता हूं कि उपरोक्त मांगों के समर्थन में मैं 13 सितंबर 2022 को महान क्रांतिकारी जतिन दास की 93 शहादत दिवस के मौके पर मंडलकारा सरायकेला में एक दिवसीय भूख हड़ताल करूंगा और फिर भी मेरी उपरोक्त मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो मैं अनिश्चित कालीन भूख हड़ताल के जरिए महान क्रांतिकारी अमर शहीद जतिन दास की क्रांतिकारी विरासत को आगे बढ़ाऊंगा।

उम्मीद है मेरी मांगों पर समुचित कार्रवाई होगी।

आवेदनकर्ता

रुपेश कुमार सिंह

विचाराधीन बंदी,

सरायकेला

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