गोदी मीडिया से लड़ने लगे हैं राहुल गांधी, लेकिन इस लड़ाई के कार्यक्रम क्या हैं?

जब तक विपक्ष जनता के बीच गोदी मीडिया को उजागर नहीं करेगा, लोकतंत्र की कोई भी लड़ाई पास टाइम है। हर नागरिक को इस गोदी मीडिया से लड़ना पड़ेगा। कांग्रेस के लिए नहीं, अपने लिए। गोदी मीडिया से लड़ाई बीजेपी के ख़िलाफ़ लड़ाई नहीं है। गोदी मीडिया से लड़ाई नागरिकों के आज़ाद अस्तित्व और स्वाभिमान के लिए है। उसे अपने लिए गोदी मीडिया से लड़ना होगा और विपक्ष को जनता की मदद करनी होगी। जनता को अंदाज़ा नहीं है कि उस पर किस तरह का गोला गिरने वाला है। उसकी चीख पुकार उसके भीतर ही दब कर रह जाएगी

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रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली थी। महंगाई के ख़िलाफ़ हल्ला बोल रैली। इस नाम से चैनलों में प्रोग्राम चलते हैं मगर हल्ला बोलने के नाम से होने वाली रैली कवर न हों, इसके लिए पहले से ही गोदी पत्रकार अफ़वाहें उड़ा रहे थे कि कांग्रेस की रैली को लेकर ट्विट करने वाले पत्रकारों को पैसे दिए गए हैं। रैली से पहले ही कुछ पत्रकारों ने इस तरह के ट्विट कर दिए। गोदी पत्रकारों को अच्छी तरह पता है कि विपक्ष को कवरेज नहीं मिलेगा। अख़बारों में भी भीतर के पन्ने पर कहीं होगा और राहुल गांधी ने मीडिया को लेकर जो कहा है, वह तो छपने से रहा। वैसे आप कल का अख़बार देख लीजिएगा और आज चैनलों को देख लीजिएगा। कितना छपता है, कितना दिखता है। बच गया सोशल मीडिया तो वहाँ भी कवर न हो इसके लिए पहले से ही पत्रकारों को ताना मार कर डराया जाने लगा। जो निर्लज्जता से गोदी मीडिया बने हुए हैं वो कांग्रेस की रैली पर ट्विट करने वालों को निष्पक्षता के नाम पर ताना मार रहे हैं। जो ख़ुद सत्ता पक्ष में समाहित हो चुका है, वह निष्पक्षता पर ताना तो मारेगा ही। मोहल्ले के बदमाश लोग कभी नहीं चाहते कि पढ़ने वाले शरीफ़ छात्र की घर-घर तारीफ़ हो।
रामलीला मैदान में राहुल गांधी ने मीडिया को लेकर विस्तार से बात की। राहुल ने कहा कि देश में मीडिया नहीं है। मीडिया अब केवल दो उद्योगपतियों के हाथ में चला गया है। इन दो उद्योगपतियों का सारा मीडिया मोदी जी के लिए काम करता है और मोदी जी इन दो उद्योगपतियों के लिए काम करते हैं। मीडिया अब जनता की आवाज़ नहीं उठाता। विपक्ष की आवाज़ नहीं दिखाता। इसलिए कांग्रेस और विपक्ष को जनता के बीच जाना होगा। कई महीनों से राहुल के हर भाषण के केंद्र में मीडिया होता है। बिना मीडिया को उजागर किए उनका कोई भाषण पूरा नहीं होता है। उन्हें इस बारे में और विस्तार से बात करना चाहिए। कार्यकर्ताओं को बताना चाहिए कि उन्हें गोदी मीडिया से लड़ने के लिए क्या करना चाहिए। उसके कार्यक्रम क्या होने चाहिए। अख़बारों और चैनलों को लेकर कैसे जनता के बीच जाना चाहिए। उनका भाषण मुद्दों को रेखांकित तो करता है मगर विस्तार नहीं देता। जिस तरह से महंगाई का डिटेल दिया उसी तरह राहुल गांधी को अब नाम लेकर बोलना होगा, अपने अध्ययन के साथ बोलना होगा तभी उनके कार्यकर्ता को पता चलेगा कि जनता को क्या बताना है। विपक्ष गोदी मीडिया की आलोचना तो कर रहा है मगर अभी भी उसकी आलोचना में तैयारी की कमी दिखती है। यह एक असंभव लड़ाई है और इसकी तैयारी आधे-अधूरे तरीक़े से नहीं की जा सकती है।
मैं हमेशा से मानता रहा हूँ कि जब तक विपक्ष जनता के बीच गोदी मीडिया को उजागर नहीं करेगा, लोकतंत्र की कोई भी लड़ाई पास टाइम है। हर नागरिक को इस गोदी मीडिया से लड़ना पड़ेगा। कांग्रेस के लिए नहीं, अपने लिए। गोदी मीडिया से लड़ाई बीजेपी के ख़िलाफ़ लड़ाई नहीं है। गोदी मीडिया से लड़ाई नागरिकों के आज़ाद अस्तित्व और स्वाभिमान के लिए है। उसे अपने लिए गोदी मीडिया से लड़ना होगा और विपक्ष को जनता की मदद करनी होगी। जनता को अंदाज़ा नहीं है कि उस पर किस तरह का गोला गिरने वाला है। उसकी चीख पुकार उसके भीतर ही दब कर रह जाएगी।
इस समय जनता मीडिया से लड़ रही है मगर पूरी तैयारी के साथ नहीं। कभी वह अपने मुद्दों को लेकर ट्विटर पर ट्रेंड कराती है तो कभी लोकल चैनल के पास जाती है। वहाँ कवर नहीं होता है तो राष्ट्रीय चैनलों के पास जाती है। अख़बार भीतर के पन्नों पर जनता की ख़बरें छाप देते हैं। जनता महसूस कर रही है लेकिन वह गोदी मीडिया के ख़तरों को ठीक से नहीं समझ रही है। अख़बारों और चैनलों से थक-हार कर आप यू-ट्यूबर के पास जाते हैं। एक दिन वहाँ भी दरवाज़े बंद होने वाले हैं बल्कि बंद हो रहे हैं। सूचनाएँ कम हैं। विश्लेषण ही ज़्यादा है।
गोदी मीडिया से लड़ने में राहुल गांधी ने देर कर दी लेकिन वे अब गोदी मीडिया के ख़िलाफ़ बोलने लगे हैं। 2014 के पहले मीडिया विपक्ष की तरफ़ से सरकार से सवाल करता था,आज मीडिया ने विपक्ष को ही ग़ायब कर दिया है। तब बीजेपी की प्रेस कांफ्रेंस कांग्रेस से पहले कवर की जाती थी और बीजेपी के सवाल पर कांग्रेस से जवाब माँगा जाता था। आज कांग्रेस की बात रखने पर गोदी पत्रकार पत्रकारों को टार्गेट कर रहे हैं।
याद रखना चाहिए। विपक्ष का मतलब कांग्रेस और राजद नहीं होता है। विपक्ष का मतलब होता है जनता। जनता को झूठ और भय के आधार पर डराया जा रहा है। जनता हर बार पहले से ज़्यादा पीछे हट रही है जब जनता ही नहीं बचेगी तो देश कैसे बचेगा। अंग्रेज़ों के शासन में जनता ग़ुलाम थी, इसलिए देश नहीं था। तब जनता ने तय किया कि भारत माता की बेड़ियों को तोड़ देंगे। देश बन गया। जिन्हें लगता है कि वे देश के लिए कुछ करना चाहते हैं। उन सभी को गोदी मीडिया से लड़ना चाहिए। यह सबसे आसान लड़ाई है लेकिन मुश्किल है कि इसके लिए पहले ख़ुद से लड़ना पड़ता है। ख़ुद को आज़ाद कराना पड़ता है, इसीलिए यह उतनी ही मुश्किल लड़ाई भी है।
ये लेख रविश कुमार के फेस्बूक पेज से ली गयी है।

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