हिमालय की आवाज़ें और ज़ाकिर हुसैन की अनोखी धुनों से प्रभावित लेखक (पं. रवि शंकर के शागिर्द और सितारवादक) अपनी ज़िंदगी में उनके संगीत से मिली प्रेरणा को याद करते हैं। ज़ाकिर का संगीत परंपराओं से आगे बढ़कर तबले को जैज़, अफ्रीकी और लैटिन बीट्स से जोड़ता रहा, लेकिन उनके पंजाब घराने की जड़ों के लिए उनका प्यार कभी कम नहीं हुआ। उनकी मासूम, बच्चे जैसी लगन और गहरे एहसास ने हमेशा संगीतकारों को रास्ता दिखाया है। आज दुनिया उनके जाने का ग़म मना रही है, मगर उनका संगीत हमेशा ज़िंदा रहेगा
हिमालय की आवाज़ें और ज़ाकिर हुसैन की अनोखी धुनों से प्रभावित लेखक (पं. रवि शंकर के शागिर्द और सितारवादक) अपनी ज़िंदगी में उनके संगीत से मिली प्रेरणा को याद करते हैं। ज़ाकिर का संगीत परंपराओं से आगे बढ़कर तबले को जैज़, अफ्रीकी और लैटिन बीट्स से जोड़ता रहा, लेकिन उनके पंजाब घराने की जड़ों के लिए उनका प्यार कभी कम नहीं हुआ। उनकी मासूम, बच्चे जैसी लगन और गहरे एहसास ने हमेशा संगीतकारों को रास्ता दिखाया है। आज दुनिया उनके जाने का ग़म मना रही है, मगर उनका संगीत हमेशा ज़िंदा रहेगा