भाजपा के लिए राजस्थान में 2019 जैसी सफलता पाना आसान नहीं, 10 सीटों पे ख़ासी दिक्कत

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[dropcap]रा[/dropcap]जस्थान में दो चरण में लोकसभा चुनाव होंगे। पहले चरण में चुनाव 19 अप्रैल को 12 सीटों  बीकानेर गंगानगर चूरू झुंझुनू सीकर नागौर जयपुर ग्रामीण जयपुर शहरी अलवर भरतपुर करौली-धौलपुर और दौसा  में होंगे।

2023 में हुए विधानसभा के चुनावों के परिणामों और वर्तमान स्थितियों की समीक्षा में सामने आते समीकरण से तस्वीर कुछ साफ हो जाती है। भारतीय जनता पार्टी अबकी बार कितनी सीटें जीत सकती है या उसके तिलिस्म के टूट जाने के संकेत धरातल पर दिखाई देंगे। 2019 में भाजपा ने यहाँ से सभी 25 सीटें जीती थी, उस वक़्त राज्य में कांग्रेस की सरकार थी, और इस बार भाजपा की। हालांकि 2023 में अशोक गेहलोत की सरकार गिर गयी पर दोनों पार्टियों में मतों का ज्यादा अंतर नहीं रहा, इसी से ये अनुमान लगाया जा रहा के भाजपा के लिए पाँच साल पहली वाली सफलता दुहराना आसान नहीं होगा। जमीनी हालात भी कुछ वैसे ही हाल बता रहे हैं।

दौसा की लोकसभा सीट के अंतर्गत 8 विधानसभा आती हैं। बस्सी, चाकसू, थानागाजी, बांदीकुई, महोबा, सिकराय, दौसा और लालसोट। भाजपा के यहाँ से 5 विधायक 2023 में जीते हैं। कांग्रेस के 3 विधायक हैं। 2019  में पुलवामा लहर के चलते इस सीट पर भाजपा की जसकौर मीणा ने 548733 वोट हासिल किये जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार सविता मीणा ने 470289 वोट पाए थे।

पूर्वी राजस्थान की सबसे चर्चित सीट दौसा में अब भाजपा के लिए मुश्किलें बढ़ने लगी हैं, दौसा से भाजपा ने कन्हैया लाल मीणा को प्रत्याशी बनाया है, निवर्तमान संसद जसकौर मीणा का टिकट काट दिया गया। वहीँ किरोड़ी लाल मीणा इस टिकट को ले कर खासे नाराज़  हैं कियुँकि वो अपने भाई जगमोहन मीणा को टिकट दिलवाने के लिए प्रयासरत थे। दौसा से पहले सचिन पायलट सांसद रह चुके हैं कांग्रेस ने पूर्व मंत्री वर्तमान विधायक मुरारी लाल मीणा को चुनाव में उतारा है।

भरतपुर की सीट में जिले की 7 विधानसभा व एक विधानसभा अलवर जिले की आती है। कमान नगर, डीग-कुम्हेर, भरतपुर, नदबई, वियर, बयाना, थानागाजी हैं। भाजपा का गढ़ में यहाँ 5 विधायक भाजपा के व एक-एक रालोद, कांग्रेस और निर्दलीय है। भरतपुर अनुसूचित जाती के लिए आरक्षित सीट है। भरतपुर की सीट पर कोई भी पार्टी अभी तक हैट्रिक नहीं लगा पाई ये तासीर यहाँ के मतदाताओं की है।

भाजपा ने यहाँ अपना प्रत्याशी फिर से बदल दिया है। अबकी बार रामस्वरूप कोली को यहाँ से प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस ने संजना जाटव पर भरोसा जताया है। बसपा ने इंजीनियर अंजिला शकरावल को अपना उमीदवार बनाया है। 2019 में रंजीता कोली ने एक बड़ी जीत यहाँ से प्राप्त की थी। पुलवाना की लहर में 707992 वोट बटोरने में सफल रही थी। कांग्रेस के अभिजीत कुमार जाटव को 389593 को वोट मिले थे। स्थानीय समीकरण और जनता जनार्दन अबके किस तरह से व्यवहार करेंगे चुनाव के अंतिम दिनों तक साफ हो जायेगा।

करौली धौलपुर की सीट का अधिकतर हिस्सा मध्यप्रदेश और उतर प्रदेश के साथ लगता हुआ है। 2008 में पुन परिसीमन के बाद यह लोकसभा क्षेत्र आरक्षित हो गयी थी। बसेरी बरी धौलपुर राजाखेड़ा टोडाभीम हिण्डोन करौली सपोटरा विधान सभा क्षेत्र इस लोकसभा में हैं।

वर्तमान में यहाँ से कांग्रेस के 5 विधायक भाजपा से 2 और बसपा से एक विधायक हैं।

करौली-धौलपुर लोकसभा सीट के लिए भाजपा ने प्रत्याशी इंदु देवी जाटव को प्रत्याशी घोषित किया है, कांग्रेस प्रत्याशी भजनलाल जाटव और बसपा प्रत्याशी विक्रम सिंह हैं। अधिकतर मतदाता लगभग 82% ग्रामीण पृष्ठभूमि से हैं। यह क्षेत्र पिछड़ा हुआ कहा जाता है। अनुसूचित जाती के यहाँ करीब 22.5% मतदाता है और अनुसूचित जनजाति के 14.6% और मुस्लिम समुदाय के 4% मतदाता हैं। 2019 की लहर में यहाँ से मनोज रजोरिया ने 526443 वोट प्राप्त किए थे। कांग्रेस के संजय जाटव ने 428761 मत हासिल किये थे। 2023  की विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को यहां 7 विधानसभा में 589040 मत मिले थे जबकि मुख्य विपक्षी भाजपा को 7 विधानसभा में 534199 मत मिले थे। बसपा को यहाँ 2 विधानसभा में 153935 मत प्राप्त हुए थे। यहाँ मुकाबला काफी रोचक होगा। स्थानीय समीकरण यहां बहुत महत्वपूर्ण हो गए हैं। कौन कितने रूठे हुए को मना पाता यही सफलता का सूत्र होगा।

अलवर की सीट हॉट सीट की श्रेणी में आ गई है। राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में यहाँ से 5 सीट कांग्रेस जीती हैं। यहाँ से संसद महंत बालक नाथ को भाजपा ने विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाया था और वो विधायक का चुनाव हार गए। भाजपा को 8 विधानसभा वाली इस लोकसभा सीट में केवल 2 सीटों पर ही जीत 2023 के विधानसभा चुनावों में मिल पाई थी। तिजारा किशनगढ़ बॉस मुंडावर बहरोड़ अलवर ग्रामीण अलवर शहरी रामगढ़ राजगढ़ लक्ष्मणगढ़ सीट अलवर लोकसभा में हैं।

जातीय समीकरण में यादव यहाँ 13.63%, अनुसूचित जाति 17.8%, अनुसूचित जनजाति 5.9%, ब्राह्मण 11.21%, मुस्लिम 18.6%, जाट 8.13%, माली 5.06%, सिख 2.3%, गुज्जर 3.8% हैं।

भाजपा ने यहां से महंत बालकनाथ को बदल कर भूपेंदर याहव को टिकट दिया है। भूपेंदर यादव  के बारे में पहले हरियाणा से चुनाव में उतरने की अटकलें लगाई जा रही थी। पिछली बार महंत बालक नाथ ने एक बड़े अंतर् से यहाँ जीत हासिल की थी। कांग्रेस ने मुंडावर विधायक ललित यादव को मैदान में उतारा है, जबकि बीएसपी से फजल हुसैन पर दांव खेला है।

जयपुर ग्रामीण कोटपूतली विराटनगर शाहपुरा फुलेरा आम्बेर झोटवाड़ा जामवा-रामगढ़ बानसूर की विधानसभाओं का क्षेत्र है। कांग्रेस ने यहाँ से 2023 के विधानसभा चुनाव में 3 सीटों पर जीत पाई और भाजपा 5 सीटों पे जीती है। भाजपा को 7 विधान सभा में 645705 वोट प्राप्त हुए थे जबकि कांग्रेस को 637658 मत मिले। एक निर्दलीय को लगभग 59124 व एक प्रत्याशी आसपा (कांशीराम ) को 54185 मत मिले। 2014 और 2019 राज्यवर्धन सिंह राठौर यहाँ से विजयी रहे थे जिन्हें विधानसभा चुनाव के दौरान विधायक के चुनाव के लिए उतर दिया गया था। भाजपा ने अब यहाँ से राव राजेंद्र सिंह को चुनाव में उतरा है कांग्रेस ने अनिल चोपड़ा को अपना प्रत्याशी बनाया है। कोटपूतली विराटनगर शाहपुरा फुलेरा बानसूर के समीकरण इस सीट को बहुत प्रभावित करने वाले हैं जहाँ से स्थानीय मतदाताओं में एक हलचल भीतर ही भीतर चल रही है। यह सीट भाजपा के लिए सरल नहीं रह गई है।

जयपुर शहरी सीट एक तरह से भाजपा का गढ़ माना जाता है। 2023 के विधानसभा चुनाव में विधान सभा की 6 सीट यहाँ भाजपा क खाते में हैं जबकि कांग्रेस को यहाँ 2 सीट ही मिल पाई। हवा महल विद्याधर नगर सिविल लाइन्स किशन पोल मालवीय नगर आदर्श नगर सांगानेर बांगरू की सीटों की यह लोकसभा शहरी मतदाताओं की मानी जाती है। भाजपा ने यहाँ भी निवर्तमान सांसद का टिकट काट कर नए प्रत्याशी मंजू शर्मा को चुनाव में उतारा है, कांग्रेस ने अब टिकट बदल कर प्रताप सिंह खाचरियावास को अपना प्रत्याशी बनाया है। मंजू शर्मा भाजपा  के कद्दावर नेता कई बार के विधायक भंवर लाल शर्मा की बेटी है। कहा जा रहा है के नरेंद्र मोदी की पसंद के कारण मंजू शर्मा को दो बार के सांसद रामचरण बोहरा की जगह टिकट दिया गया है।

वहीँ कांग्रेस को भी अपना प्रत्याशी जयपुर डायलॉग से जुड़े विवादित सुनील शर्मा को बदलना पड़ा है। प्रतापसिंह खाचरियावास को मैदान में उतरा गया है जो भैरों सिंह शेखावत के भतीजे हैं। अबकी बार जयपुर सीट एक तरफा नहीं रहेगी यहाँ भाजपा को काफी मशक्क्त करनी पड़ेगी।

लोकसभा के चुनाव में राजस्थान में गहमागहमी काफी तेजी से बढ़ेगी जिसमे भाजपा की बड़ी रैलियों चुनावों को किस तरह प्रभावित करेंगी ये देखना रोचक होगा। भाजपा के 400 पार के नारे को राजस्थान कितना बल दे पायेगा ये पहले चरण के चुनाव में स्पष्ट होने लगेगा। वर्तमान परिस्थितियों में जो संकेत धरातल से उभर रहे हैं उनमे भाजपा के लिए राजस्थान में लगभग 10 सीटें फंसी हुयी लगने लगी है जिनपे गंभीर चुनौतियों का सामना अबकी बार पार्टी को करना पड़ेगा।

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