आप निडर होकर मोदी सत्ता की मनमानी को चुनौती नहीं दे सकते

जो भी सवाल करे, सवाल उठाए, उस पर आतंकी, देशद्रोही का ठप्पा लगाकर जेल भेज देना चाहिए। जो सत्ता का तलवा चाटे, आम कैसे खाते हैं, एनर्जी का राज पूछे–उसे सत्ता गोद में बिठा लेती है। आम जनता ने इसी पत्रकारिता को सहज स्वीकार कर लिया है, जो वास्तव में पक्षकारिता है। सत्ता के पक्ष में। आप गांव में गरीबी, भुखमरी, दमन और सामंतवाद को रिपोर्ट नहीं कर सकते

Date:

Share post:

[dropcap]क्या[/dropcap] आपने CAA विरोधी आंदोलन को कवर किया?

क्या आपने किसान आंदोलन को कवर किया था?

क्या आप सिग्नल मैसेजिंग ऐप का उपयोग करते हैं?

क्या आपको इस ऐप पर चीन से इनक्रिप्टेड मैसेज मिले?

इन सवालों के बाद न्यूजक्लिक के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ गिरफ्तार कर लिए गए। आतंकी कानून में।
सब–कुछ कानून के तहत हो रहा है। फ़र्क सिर्फ इतना है कि मोदी सत्ता कानून को अपने चश्मे से देखती, परिभाषित करती है।

इस परिभाषा में जो भी सवाल करे, सवाल उठाए, उस पर आतंकी, देशद्रोही का ठप्पा लगाकर जेल भेज देना चाहिए।
जो सत्ता का तलवा चाटे, आम कैसे खाते हैं, एनर्जी का राज पूछे–उसे सत्ता गोद में बिठा लेती है।

आम जनता ने इसी पत्रकारिता को सहज स्वीकार कर लिया है, जो वास्तव में पक्षकारिता है। सत्ता के पक्ष में।

आप गांव में गरीबी, भुखमरी, दमन और सामंतवाद को रिपोर्ट नहीं कर सकते।

आप इस देश में कॉर्पोरेट्स की लूट पर सवाल नहीं उठा सकते। आप निडर होकर सत्ता की मनमानी को चुनौती नहीं दे सकते।

आपको हर बार यही कहना होगा–मोदी महान है। मोदी भगवान है। कल परोंजॉय गुहा ठाकुरता ने यही किया।
हेल मोगांबो। हेल फ्यूहरर (नेता–जर्मन शब्द, जो हिटलर को कहते थे)।

दलाल एजेंसी एएनआई का माइक खींचकर यही कहा। पीछे माइक लेकर खड़े बाकी दल्ले हंस रहे थे।

हमारे समाज की इसी नपुंसकता (वियाग्रा भी नाकाम है) ने भारत के प्रेस को 180 देशों में 161वें नंबर पर ला खड़ा किया है।

समाज हंस रहा है। सत्ता हंस रही है। गांव का बाभन, ठाकुर ठहाके लगा रहा है।

कल को जब वही बाभन, ठाकुर आपको, आपके परिवार को सरेआम नंगा करेगा तो आवाज़ उठाने किसके पास जायेंगे?

तब आपका साथ देने वाला कोई नहीं होगा। आपके लिए आवाज उठाने वाला भी कोई नहीं होगा।

जापानी पहले हाराकिरी किया करते थे। इज्जत बचाने के लिए अपने हाथ से खुद का गला काट लेना।

भारत का समाज बहुत पहले यह कर चुका है। इज़्ज़त गंवाकर।

इस समाज पर अब न बातों का असर होगा, न लातों–लानतों का।

spot_img

Related articles

Dead at 33: Twisha Sharma, Narrative Management, and Elite Patriarchy

Twisha Sharma’s suspicious death has triggered disturbing questions about victim-blaming, elite patriarchy, and how public narratives can overshadow forensic concerns and demands for justice

‘Bulldozers, AI and Freedom of Speech’: Bengal’s New BJP Govt Faces Sharp Questions at Kolkata Roundtable

A Kolkata roundtable debated Bengal BJP government’s healthcare policies, bulldozer actions, freedom of speech concerns, minority anxieties, and AI opportunities, urging constitutional governance and inclusive development over partisan politics

Prescribed an MRI? Fearful of the ‘Tunnel’? Here’s Why Open MRI May Not Always Be the Best Option

Open MRI systems reduce anxiety and improve patient comfort, yet high-field closed MRI scanners still provide superior image clarity essential for detecting strokes, tumors, ligament injuries, and neurological disorders accurately

Silent Brain Damage: How High Blood Pressure Affects the Brain

High blood pressure, or hypertension, is often called a “silent killer” because it may not produce noticeable symptoms...